हरियाणा के कैथल में धान की 1121 किस्म के सुधार कर बनाई गई 1509 किस्म इस बार चावल निर्यात सहित किसानों की इस सीजन में दशा बदलने वाली है।
मात्र 120 दिन में तैयार होने वाली इस किस्म का चावल मजबूत भी है। इस कारण यह मिलरों सहित निर्यातकों की पहली पसंद बन गई है।
सीजन की शुरूआत में ही इस किस्म के लिए किसानों को अप्रत्याशित कीमत मिलने लगी है। सीजन में इसकी कीमत 3500 रुपये प्रति क्विंटल से भी ऊंचा रहने की संभावनाएं हैं।
पूर्व में परंपरागत बासमती किस्म ही निर्यात होने वाले चावल में शामिल थी। इसके बाद वर्ष 2008 में विकसित हुई धान की 1121 किस्म से ऐसी धूम मचा दी थी कि निर्यातकों सहित किसानों की यह पहली पसंद बन गई थी।
पिछले कई सीजन में धान की बासमती 1121 किस्म परंपरागत बासमती से भी अधिक कीमतों पर बिकी है। इस कारण इस समय धान उत्पादक क्षेत्र में अधिकतर एरिया में 1121 का कब्जा है।
1121 से भी आगे निकली 1509
पूसा के वैज्ञानिकों की ओर से तैयार की गई मात्र 120 दिनों में तैयार होेने वाली 1509 किस्म अब शायद 1121 को भी पछाड़ देगी। पहली बार किसानों को उपलब्ध करवाए गए इस धान के बीज से उत्पादित इस सीजन में नई किस्म ने मंडियों में दस्तक दे दी है।
मंडियों में खरीददारों को जो पहला रिस्पांस मिला है, वह न केवल किसानों बल्कि आढ़तियों और व्यापारियों के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।
3262 रुपये में बिकी पहली ढेरी
पिछले सीजन में परंपरागत बासमती सहित 1121 भी 3000 रुपये के आस-पास रही। स्टॉक किए जाने के बाद इससे भी अधिक कीमत मिली थी।
लेकिन सीजन की शुरूआत में ही 1509 की पहली ढेरी को कैथल अनाज मंडी में 3262 रुपये में खरीदा गया है। नरेश कुमार सुरेश कुमार फर्म के आढ़ती रॉकी ने बताया कि इस किस्म के लिए खरीददारों में होड़ लगती हुई नजर आई।
हरिपुरा के किसान पृथ्वी सिंह की धान को 3262 रुपये में मस्ताना राइस मिलर ने खरीदा है।
विशेषज्ञों की राय में विशेष वैरायटी
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि पूसा वैज्ञानिकों की ओर से 1121 को विकसित रूप देते हुए बनाई गई यह निर्यात के लिए विशेष वैरायटी है।
जो कम अवधि में तैयार हो जाती है। इससे किसानों को काफी लाभ मिलेगा।
चौधरी चरण सिंह धान अनुसंधान केंद्र कौल के प्रभारी धान विशेषज्ञ डॉ. धर्म सिंह ने बताया कि अखिल भारतीय परिषद अनुसंधान परिषद की ओर से तैयार की गई 1509 ने काफी अच्छी पैदावार दी है। जिस हिसाब से इस किस्म के लिए कीमत मिल रही है, उस हिसाब से अगले साल यह निश्चित तौर पर 1121 से ज्यादा इलाके में उत्पादित की जा सकती है।
निर्यात के लिए अच्छी
चावल निर्यातक एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया का कहना है कि निर्यात के लिए यह उम्दा फसल है। यह 20 दिन पहले पक जाती है।
विशेष रूप से मिलिंग के दौरान चावल के मजबूत होने के चलते चावल कम टूटेगा। इसका मिलर्स सहित निर्यातकों को भी फायदा मिलेगा।
किसानों को प्रति एकड़ 70 से 80 हजार रुपये की आमदनी हो सकती है। उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र में यह 3800 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत से भी बिकी है।
धान की विशेषताएं
1. 45 से 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
2. चावल अपेक्षाकृत 1121 से थोड़ा लंबा और मजबूत
3. अच्छी सुगंध
4. चावल पकने के बाद डेढ़ गुणा अधिक बढ़ जाएगा
5. अन्य वैरायटी 140 से 150 दिन तक तैयार होती हैं, यह 120 दिन में तैयार हो जाएगी। किसानों को गेहूं के बाद 3 माह का समय अन्य फसलों के लिए मिलेगा।
1509 किस्म के जनक पूसा वैज्ञानिक ने कहा-
पूसा बासमती 1509 के जनक एवं पूसा इंस्टीट्यूट में मुख्य चावल वैज्ञानिक डॉ. ए के सिंह ने कहा कि 1509 वैरायटी 1121 की तीन कमियों को दूर करते हुए बनाई गई है।
यह पकने में मात्र 120 दिन लेगी, चावल के पकने के बाद समान मोटाई रहेगा और अधिक खुशबूदार होगा। इसके पौधे की अधिकतम लंबाई एक मीटर ही रहेगी।
दूसरा इसकी पैदावार 1121 से ज्यादा है। सबसे बड़ा फायदा हरियाणा एवं पंजाब में चूंकि इसे 20 जुलाई से अगस्त के प्रथम सप्ताह तक रोपाई की जा सकेगी।
इससे पानी की कई गुणा बचत होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि 1121 के मार्केट में आने के बाद भी इस किस्म की काफी अच्छी कीमत मिलेगी।