सोनीपत। दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बड़ी से बड़ी बाधा भी आपका रास्ता नहीं रोक सकती। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है गांव नांदनौर निवासी सेवानिवृत्त फौजी बिजेंद्र आंतिल ने। जिन्होंने पहले 18 साल तक सेना में रहते हुए देशसेवा की, अब युवाओं का भविष्य संवारते हुए उन्हें कबड्डी का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके लिए बिजेंद्र आंतिल ने गांव में अपनी जमीन पर कबड्डी की अकादमी खोली और युवाओं को नि:शुल्क प्रशिक्षण देना शुरू किया। बिजेंद्र आंतिल ने 10 साल पहले जो मुहिम शुरू की थी, उसके परिणाम सामने आने लगे हैं। यहां प्रशिक्षण लेने वाले युवा ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक प्रतिभा दिखा रहे हैं। संवाद
वर्ष 1995 में सेना में हुआ था चयन
बिजेंद्र आंतिल ने बताया कि उनका जन्म 5 मई 1975 को हुआ था। 10वीं तक की पढ़ाई पूरी कर वह चंडीगढ़ पहुंचे, जहां मुक्केबाजी का प्रशिक्षण लिया और राज्य स्तर पर खेले। खेल के आधार पर ही स्पोर्ट्स कोटे से वर्ष 1995 में उनका चयन आर्मी मैकेनाइज रेजिमेंट में हुआ। सेना में रहते हुए ही उन्होंने वर्ष 2000 में पीटीआई का कोर्स किया। वर्ष 2007 में उन्होंने कांगो देश में यूएन (यूनाइटेड नेशन) में 6 माह तक सेवाएं दीं। वहां से लौटने के बाद बतौर पीटीआई वर्ष 2008 से 2010 तक तक एमआईआरसी अहमदाबाद में नए रंगरूटों को प्रशिक्षण दिया। इस दौरान उन्हें बेस्ट पीटीआई के अवॉर्ड से नवाजा गया। 18 साल की सेवा के उपरांत वर्ष 2011 में वे सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद बिजेंद्र ने केनरा बैंक में बतौर सुरक्षाकर्मी नौकरी ज्वाइन की।
खेलों के मामले में काफी पीछे था गांव, अब गाड़ रहे झंडे
बिजेंद्र बताते हैं कि पहले गांव के युवा खेलों के मामले में काफी पीछे थे। उस समय निश्चय किया था कि उन्हें खेलों की तरफ अग्रसर करेंगे। यह लक्ष्य निर्धारित कर अपनी जमीन पर कबड्डी की अकादमी खोली। बिजेंद्र बताते हैं कि जब वह गांव लौटे थे, तब सुबह चार बजे सड़कें सुनसान होती थीं, आज गांव के युवा दौड़ लगाते दिखते हैं। युवा पढ़ाई के साथ खेलों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेने लगे हैं। अकादमी में प्रशिक्षण लेकर युवाओं ने ब्लॉक, जिला, राज्य स्तर पर प्रतिभा दिखाई है। यही नहीं गांव के ही यश आंतिल ने दिल्ली से नेशनल के लिए जूनियर कैटेगरी में क्वालिफाई किया है। वहीं गांव के अंकित आंतिल का स्पोर्ट्स कोटे से आर्मी में ट्रायल में चयन हुआ है। अभी लिखित परीक्षा बाकी है।
आसपास के गांवों से भी प्रशिक्षण लेने आ रहे युवा
बिजेंद्र आंतिल ने जो बीड़ा उठाया था, वह सार्थक होता नजर आ रहा है। अकादमी में अब नांदनौर के साथ ही बड़ौली, बसौदी, गढ़ी, मछौला गांव से भी युवा प्रशिक्षण लेने आने लगे हैं। वर्तमान में यहां 60 युवा प्रशिक्षण ले रहे हैं। खास बात यह है कि अकादमी में आने वाले किसी भी युवा से फीस नहीं ली जाती। खेल की किट और अन्य सुविधाएं भी अपनी जेब से ही मुहैया करवाते हैं। अकादमी में बच्चों के प्रशिक्षण में किसी प्रकार की कमी न रह जाए, इसके लिए विशेष कोच का भी प्रबंध किया गया है। उनकी इस मुहिम का कई गांवों के सरपंचों ने भी स्वागत किया है।
युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए निरंतर रहेंगे प्रयासरत
बिजेंद्र आंतिल ने बताया कि युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए जो मुहिम शुरू की थी, वह निरंतर जारी रहेगी। गांव के युवा आज पढ़ाई के साथ खेलों के प्रति जागरूक हुए हैं। युवाओं की खेल के प्रति निष्ठा और उनकी प्रतिभा को देखते हुए गांव की सूरत बदलती नजर आ रही है। आने वाले समय में यहां के युवा अपनी नई पहचान बनाएंगे। वही मेरी मेहनत का फल होगा।
बिजेंद्र आंतिल।- फोटो : Sonipat