सोनीपत। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने विशेष अभियान के तहत एक म्यूल अकाउंट का खुलासा किया है, जिसके जरिए करीब 64 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन किए गए। जांच में सामने आया कि शेयर ट्रेडिंग के नाम पर खुद ठगी का शिकार हुआ युवक बाद में कमीशन के लालच में साइबर ठगों का सहयोगी बन गया और अपने बैंक खातों के माध्यम से ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर करने लगा। पुलिस ने गोहाना क्षेत्र निवासी सुनील के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
साइबर क्राइम थाना में तैनात युद्धवीर सिंह की शिकायत पर दर्ज मामले के अनुसार टीम 14सी पोर्टल पर मिले संदिग्ध म्यूल खातों के सत्यापन अभियान के तहत कोटक महिंद्रा बैंक के एक खाते की जांच कर रही थी। तकनीकी विश्लेषण और बैंक रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि इस खाते से दिल्ली, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु में दर्ज पांच साइबर ठगी की शिकायतें जुड़ी हुई हैं। बैंक स्टेटमेंट की जांच में करीब 64 लाख रुपये का संदिग्ध लेनदेन मिला।
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने कोटक महिंद्रा बैंक के अलावा यस बैंक, आईडीएफसी बैंक और यूनियन बैंक के खातों का भी इस्तेमाल किया। उसने बैंक संबंधी दस्तावेज और अन्य जानकारी साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराई। कई बार ठग ओटीपी लेकर उसके खातों से रकम ट्रांसफर कर देते थे और बदले में उसे कमीशन देते थे।
फेसबुक विज्ञापन से शुरू हुआ ठगी का जाल
आरोपी ने बताया कि उसने फेसबुक पर शेयर ट्रेडिंग से जुड़ा विज्ञापन देखा था। इसके बाद उसने अपनी निजी जानकारी साझा कर दी। विदेशी व्हाट्सएप नंबरों से संपर्क करने वाले साइबर ठगों ने निवेश के नाम पर उससे 21 हजार रुपये ठग लिए। बाद में अधिक कमाई का लालच देकर उसे अपने बैंक खातों से साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए तैयार कर लिया।
म्यूल अकाउंट से छिपाई जाती थी ठगी की रकम
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी साइबर गिरोह के लिए म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराता था। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से मिली रकम को छिपाने, अलग-अलग खातों में पहुंचाने और जांच एजेंसियों से बचाने के लिए किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने गलत पते के आधार पर बैंक खाता खुलवाया था। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की रकम के अंतिम ठिकाने का पता लगाने में जुटी है।
क्या होता है म्यूल अकाउंट
साइबर अपराधों में म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में पहुंचाने या उसकी पहचान छिपाने के लिए किया जाता है। कई बार लोग कमीशन के लालच में अपने खाते उपलब्ध करा देते हैं, जबकि कुछ लोग अनजाने में इस जाल में फंस जाते हैं। ऐसे मामलों में खाताधारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
जांच का दायरा बढ़ाया
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ा दी है। साइबर क्राइम थाना की टीम अब गिरोह के अन्य सदस्यों, विदेशी संपर्कों, बैंक खातों की श्रृंखला और ठगी की रकम के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। अन्य राज्यों में दर्ज शिकायतों के आधार पर संबंधित एजेंसियों से भी समन्वय किया जा रहा है।