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यमुना में आठ लाख क्यूसक पानी छोड़ा, 15 गांवों में मुनादी करा हाई अलर्ट, लोगों के किनारे पर जाने को रोक

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बेगा में यमुना किनारे कट्टों में ईंट व रेत भरकर डाले गए - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। पहाड़ों पर लगातार बारिश होने के कारण यमुना में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। यमुना पर बने हथिनीकुंड बैराज से शनिवार रात से रविवार दोपहर तक 8 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से यमुना किनारे गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। बाढ़ की स्थिति देखकर 15 गांवों के लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। प्रशासन ने गांवों में मुनादी कराने के साथ ही हाईअलर्ट जारी कर दिया है। लोगों के यमुना किनारे जाने पर रोक लगा दी गई है तो मनौली में बांध के अंदर बने मकानों को खाली कराया है। इसके साथ ही राजस्व विभाग के कर्मियों की ड्यूटी यमुना किनारे लगा दी गई है और ग्रामीणों को ठीकरी पहरा लगाने के लिए कहा गया है।
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यमुना में पिछले कई दिनों से हथिनीकुंड बैराज से लगातार पानी छोड़ा जा रहा था। लेकिन वह पानी एक लाख क्यूसेक से कम होने के कारण यमुना किनारे बसे गांवों के लिए परेशानी पैदा करने वाला नहीं था। अब हथिनीकुंड बैराज से शनिवार रात से रविवार दोपहर तक लगभग आठ लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया है। यह पानी पहाड़ों पर लगातार बारिश होने के कारण यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंचने के कारण छोड़ा गया। जिससे यमुना किनारे के लगभग 15 गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। जिनमें गढ़ी असदपुर, मनौली, बड़ौली, बेगा, पीरगढ़ी, गढ़ी बिलंदा, ग्यासपुर, पबनेरा, चंदौली, टिकौला आदि शामिल हैं। क्योंकि यह पानी सोमवार तक सोनीपत में पहुंच जाएगा और उससे भारी नुकसान होने की आशंका है। अभी तक एक लाख से कम क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बावजूद यमुना के अंदर की फसल डूबने लगी थी तो आठ लाख क्यूसेक पानी से हालात काफी खराब हो सकते हैं। इन गांवों में पिछले साल भी यमुना में पानी ज्यादा आने से काफी फसल का नुकसान हुआ था। जहां यमुना के अंदर की पूरी फसल बर्बाद हो गई थी, वहीं आसपास के खेतों में पानी भरने से सब्जी व चारा की फसल भी बर्बाद हो गई थी। हथिनीकुंड बैराज से आठ लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से प्रशासनिक अधिकारियों की चिंता भी बढ़ गई है और किसी तरह से स्थिति संभालने का प्रयास किया जा रहा है।
हजारों एकड़ फसल बर्बाद होने के कगार पर
यमुना मे उफान की वजह से जिले में हजारों एकड़ फसल बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है। क्योंकि यमुना में पानी कम होने पर किसान अपनी जमीन में अंदर ही धान, सब्जी व गन्ने के साथ ही पशुओं के चारे की बुआई करते है। ऐसे में पानी आने से सब्जी व धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी तो गन्ना भी तेज बहाव के कारण बह सकता है। इसके अलावा यमुना के किनारे के खेतों की फसल भी बर्बाद होने का खतरा है, क्योंकि कई जगह पर ठोकरें नहीं होने के कारण यमुना का पानी खेतों में चला जाता है और उससे काफी फसल बर्बाद हो जाती है। पिछले साल भी इस तरह ही फसल बर्बाद हुई थी।
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बेगा में कटान रोकने को ईंटों को कट्टे में भरकर डाला जा रहा
बेगा में हर बार यमुना में पानी ज्यादा आने से मिट्टी का कटाव हो जाता है और यमुना का बहाव गांव की ओर बढ़ जाता है। इस कारण ही ग्रामीणों ने खुद ही ईंट मंगवाई हैं, जिनको कट्टों में भरकर किनारों पर लगाया जा रहा है। जिससे मिट्टी का कटाव नहीं हो सके। ग्रामीणों का आरोप है कि सिंचाई विभाग की ओर से मिट्टी का कटाव रोकने के लिए ठोकरें तक नहीं लगवाई है।
मनौली टोंकी में बांध के अंदर रह रहे लोग निकाले, बिजली काटी
मनौली टोंकी में काफी समय पहले लोगों ने यमुना के बांध के अंदर मकान बना लिए थे और उसके बाद वहां रहना शुरू कर दिया था। इस तरह वहां लगभग 30 परिवार रह रहे हैं। जिस तरह से यमुना में आठ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है तो उनके लिए भी खतरा हो गया है। इस कारण ही नायब तहसीलदार हवा सिंह ने वहां पहुंचकर उन सभी परिवारों को अपना सामान बांधकर गांव की सुरक्षित जगह पर जाने के लिए कहा है। जिससे अचानक पानी आने से किसी तरह की जान-माल की हानि से बचा जा सके। इसके अलावा यमुना किनारे के ट्यूबवेलों की बिजली कट करने के लिस कहा गया है, जिससे पानी में करंट नहीं आ सके।
यमुना किनारे जाने व धार्मिक क्रियाएं करने पर रोक, बोर्ड भी लगाए
यमुना का जलस्तर जिस तरह से लगातार बढ़ता जा रहा है, उसको देखते हुए प्रशासन ने लोगों के यमुना किनारे जाने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही यमुना किनारे पर जाकर धार्मिक क्रियाएं भी नहीं करने के लिए कहा जा रहा है। क्योंकि प्रशासन का मानना है कि यमुना में पानी के तेज बहाव के कारण किनारों से मिट्टी का कटाव होगा और ऐसे में कोई यमुना के किनारे जाकर धार्मिक क्रियाएं करता है तो मिट्टी गिरने से हादसा हो सकता है। डीसी डॉ. अंशज सिंह ने बताया कि ग्रामीणों से बात करके दिन या रात में यमुना की ओर नहीं जाने की सलाह दी गई है। इसके लिए यमुना के बांधों पर कर्मियों की ड्यूटी भी लगा दी गई है, जिससे लोगों को यमुना किनारे जाने से रोका जा सके। इसके अलावा यमुना के किनारे चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए है, जिससे किसी को यमुना के तेज बहाव के बारे में नहीं पता हो तो उसे बोर्ड से पढ़कर पता चल सके।
यमुना के पास वाले गांवों में ग्रामीण लगाएंगे ठीकरी पहरा
हथिनीकुंड बैराज से शनिवार की रात से रविवार दोपहर तक छोड़ा गया आठ लाख क्यूसक से ज्यादा पानी सोमवार तक सोनीपत में पहुंच जाएगा। ऐसे में पानी खेतों व गांव में घुस सकता है। इस कारण ही उसपर नजर रखने व किसी तरह की घटना होने पर बचाव के लिए ग्रामीणों ने ठीकरी पहरा देने का फैसला लिया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बेगा, पबनेरा, गढ़ी असदपुर आदि गांवों में ग्रामीणों से ऐसी स्थिति में सहयोग मांगा। इन गांवों में प्रशासन का सहयोग करते हुए ठीकरी पहरा लगाने की बात कही है।
हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी की वजह से यमुना में जलस्तर बढ़ता जा रहा है, जिसपर पूरी नजर रखी जा रही है। यह पानी सोमवार तक सोनीपत में पहुंचेगा, उसको देखते हुए ही आसपास के गांवों में मुनादी कराकर हाईअलर्ट जारी किया गया है। यमुना की ओर जाने पर रोक लगा दी गई है तो मनौली टोंकी में यमुना के बांध के अंदर मकान बनाकर रह रहे परिवारों को वहां से निकाल दिया गया है। इसके अलावा भी अधिकारी पूरा ध्यान रख रहे है और किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। डॉ. अंशज सिंह, डीसी
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