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पहलवानों का पीछा नहीं छोड़ रही चोट, ओलंपिक से पहले बढ़ रही परेशानी

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ओलंपिक को शुरू होने में करीब डेढ़ महीना बाकी है और उससे पहले पहलवान ज्यादा से ज्यादा चैंपियनशिप में खेलना चाहते हैं। वे अपने दांव मजबूत करने के लिए खूब अभ्यास करने में जुटे हैं, लेकिन चोट पहलवानों का पीछा नहीं छोड़ रही है, जिससे उनके लिए परेशानी खड़ी हो रही है।
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एक पहलवान का चोट के कारण गलत दवाई लेने से डोप में फंसने पर ओलंपिक कोटा छीन लिया गया है तो दो पहलवानों के चोटिल होने से प्रैक्टिस प्रभावित हो रही है। ऐसे में ओलंपिक से पहले प्रैक्टिस प्रभावित होने से पहलवानों के खेल पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ओलंपिक में देश के आठ पहलवानों ने जगह बनाई थी और हरियाणा के लिए यह इसलिए भी बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि वह सभी हरियाणा के रहने वाले थे। जिनमें रवि दहिया, बजरंग पूनिया, दीपक पूनिया, सुमित, सीमा बिस्ला, विनेश फोगाट, अंशु मलिक और सोनम मलिक थे, लेकिन ओलंपिक से पहले पहलवानों की परेशानी कम नहीं हो रही है और उनकी यह परेशानी चोट के कारण बढ़ रही है। जहां सबसे पहले सोनम मलिक को चोट लगी, जिससे वह पोलैंड में रैंकिंग सीरीज खेलने नहीं जा सकीं और उनकी प्रैक्टिस भी नहीं हो रही है, लेकिन चोट के कारण सबसे बड़ा झटका सुमित को लगा है, जिनके घुटने में चोट के कारण गलत दवाई लेने पर वह डोप में फंस गए। उनके लिए यह चोट बड़ा झटका देकर गई और उनका ओलंपिक कोटा ही छिन गया। वहीं अब दीपक पूनिया के चोटिल होने से झटका लगा है, जिससे फिलहाल उनका खेलना बंद हो गया है और वह प्रैक्टिस भी नहीं कर सकेंगे। इस तरह ओलंपिक के नजदीक होने के बावजूद प्रैक्टिस नहीं होने से पहलवानों के खेल पर बड़ा असर पड़ता दिख रहा है। उनके कोच भी मानते है कि किसी भी गेम्स से पहले होने वाली प्रैक्टिस ही खिलाड़ी के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होती है और उस दौरान प्रैक्टिस में इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक से उसे फायदा मिलता है।
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वर्जन
पहलवान चोटिल होने के कारण प्रैक्टिस नहीं कर पाते हैं तो उसके खेल पर असर पड़ता है। क्योंकि पहलवान को यह भी ध्यान रखना होता है कि ज्यादा प्रैक्टिस करने से चोट बढ़ सकती है और उसके लिए उससे आगे भी परेशानी हो सकती है। हालांकि हमें उम्मीद है कि हमारे पहलवान चोट से उबरकर हर दांव आजमाएंगे और वे पहले की तरह लय में आकर देश के लिए मेडल जीतेंगे।
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- कुलदीप मलिक, चीफ कोच
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