सोनीपत। शारदीय नवरात्र उत्सव के तीसरे दिन मंगलवार को मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भक्तों ने मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद मांगा।
सुबह से ही मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। भक्तों ने माता रानी के दरबार में मत्था टेककर घर-परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।
शहर के बड़ा बाजार स्थित सिद्धपीठ चिटाने वाली माता मंदिर, कामी रोड स्थित सिद्धपीठ श्रीचंडी मां महाकाली प्राचीन मंदिर, सेक्टर-14 के श्रीचिंतपूर्णी मंदिर, सिद्धपीठ बाबा धाम मंदिर, मॉडल टाउन स्थित नवदुर्गा माता मंदिर, कच्चे क्वार्टर के दुर्गा मंदिर और कैलाश कॉलोनी स्थित शिव धाम मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। कई मंदिरों और घरों में दुर्गा सप्तशती व दुर्गा चालीसा का पाठ किया गया। महिला संकीर्तन मंडलियों ने भजन-कीर्तन के माध्यम से मां दुर्गा का गुणगान किया।
मां चंद्रघंटा की आराधना से दूर होती हैं बाधाएं:
चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप मां चंद्रघंटा बाघ पर सवार हैं। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मान्यता है कि उनकी आराधना से श्रद्धालुओं को आरोग्य, सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। मां की कृपा से कष्टों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। साहस और पराक्रम बढ़ता है।
शिव शक्ति धाम में मां चंद्रघंटा का पूजन :
नंदवानीनगर स्थित शिव शक्ति धाम में मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। महामंडलेश्वर अंजनी देवा गिरि महाराज ने मां चंद्रघंटा का पूजन किया। आचार्य पं. रामकृष्ण पाठक ने विधिवत पूजन और धार्मिक पाठ करवाए। इस दौरान मां चंद्रघंटा से सुख-शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की गई। महामंडलेश्वर अंजनी देवा गिरि महाराज ने बताया कि मां चंद्रघंटा की पूजा से भक्तों में वीरता और निर्भीकता के साथ सौम्यता एवं विनम्रता का विकास होता है। नवरात्र के चौथे दिन बुधवार को मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां कूष्मांडा की आराधना करने से साधकों को सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।