फोटो 01- सोनीपत के गुड़ मंडी स्थित जैन स्थानक में चातुर्मास पर आयोजित धर्म सभा में प्रवचन करते
सोनीपत। मानव मिलन के संस्थापक एवं नेपाल केसरी राष्ट्र संत डॉ. मणिभद्र मुनि महाराज ने कहा कि जीवन का अर्थ केवल भौतिक सुख-सुविधाओं का संचय करना नहीं है। असली सुख का अनुभव तब होता है, जब मनुष्य मन को शांति प्रदान करता है। मन की स्थिति ईर्ष्या, भय व लोभ से मुक्त होकर मनुष्य को जीवन के वास्तविक आनंद का अनुभव कराती हैं।
डॉ. मणिभद्र महाराज गुड़ मंडी स्थित श्रीएसएस जैन सभा जैन स्थानक में चातुर्मास पर आयोजित धर्म सभा में प्रवचन कर रहे थे। मुनि महाराज ने कहा कि ईर्ष्या मनुष्य को नकारात्मकता की ओर ले जाती है, उसे अपनी उपलब्धियों से संतुष्ट नहीं होने देती। भय स्वाभाविक भावना है, जो मनुष्य को मानसिक व शारीरिक रूप से कमजोर बना देता है। लोभ वह भावना है, जो मनुष्य को अधिक से अधिक पाने के लिए प्रेरित करता है। यह कभी-कभी दूसरों की खुशियों को नष्ट कर सकती है। सभा में पुनीत मुनि महाराज व महासाध्वी सृजना महाराज ने भी श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया।