सोनीपत। गन्नौर कोर्ट में हुई विकास दूधिया की हत्या के मामले में सेक्शन-319 की अपील में तत्कालीन इंस्पेक्टर कंवल सिंह को अदालत ने सह आरोपी मानते हुए वारंट जारी किए थे। इस पर आरोपी ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। मृतक के परिजनों ने कंवल सिंह पर षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया था।
पानीपत के सिवाह गांव के रहने वाले वेदपाल ने 11 मार्च, 2016 को गन्नौर थाने में शिकायत दी थी। कहा था कि उसके चचेरे भाई विकास उर्फ दूधिया की गन्नौर कोर्ट परिसर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिसकर्मियों ने बताया था कि गोली मारने वाले आरोपी दिल्ली के मुंगेशपुर के गौरव और बरोणा के रूपेंद्र उर्फ नान्हा को पकड़ लिया गया है। उसके साथ घेवरा का रवि, बरोणा का अजय, दिल्ली का यशबीर, जाजी का राहुल भी थे। आरोपियों ने आपराधिक प्रवृति के संदीप बड़वासनिया के कहने पर वारदात को अंजाम दिया था।
न्यायाधीश आलोक जैन ने याचिका रद्द करते हुए कहा मामले में पर्याप्त सबूत हैं। विकास उर्फ दूधिया का मरने से पूर्व का बयान भी है। सच्चाई को उजागर करने व आठ वर्ष से लंबित मुकदमे को पूरा करने के लिए हिरासत में पूछताछ बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसे में तत्कालीन इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी हो सकती है।
विकास ने हत्या की जताई थी संभावना
भाई वेदपाल ने आरोप लगाया कि वह 9 मार्च, 2016 को अपने भाई विकास से मिला था। उसने बताया था कि गार्द इंचार्ज कंवल सिंह और और एएसआई भगत सिंह ने उसे कहा है कि वह उसके साथी रामकरण और उसे दो तीन दिन में या तो खुद मार देंगे या मरवा देंगे। इस पर विकास के कहने पर उसकी सुरक्षा की अर्जी दाखिल की थी।
पॉलीग्राफ टेस्ट और जांच में नहीं मिले थे सबूत
गन्नौर थाना पुलिस ने 6 जून, 2016 को फाइनल रिपोर्ट दाखिल की थी। इसमें कहा कि घटना वाले दिन इंस्पेक्टर कंवल सिंह और एएसआई भगत सिंह और संदीप बड़वासनिया के भाई रविंद्र से कोई संपर्क नहीं था। इसके बाद डीएसपी स्तर के अधिकारी समेत कई टीमों ने मामले की जांच की थी। फरवरी, 2018 को पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया गया था। इसमें भी उसका रोल नहीं बताया था। उसके बाद विकास दूधिया पक्ष की तरफ से 25 फरवरी, 2022 को सेक्शन 319 के तहत कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी।