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किसान महापंचायत: दिल्ली बॉर्डर पर हुई वीडियोग्राफी, किसानों के वाहनों के नंबर नोट कराए

Tue, 23 Aug 2022 01:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)

सार

दिल्ली में किसान महापंचायत चलते पुलिस ने बैरिकेड लगा रखे थे। साथ ही रेत से भरे डंपर खड़े किए गए थे। किसान नेता बोले कि सरकार वादों से मुकरी है, जल्द सुनवाई नहीं हुई तो फिर से आंदोलन होगा। 
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केएमपी के पास जाम में फंसी रोडवेज बस। संवाद - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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संयुक्त किसान मोर्चा (अराजनैतिक) के आह्वान पर दिल्ली के जंतर-मंतर के लिए निकले किसानों ने पहले ही शांतिपूर्ण तरीके से महापंचायत करने व ज्ञापन सौंपने की घोषणा कर दी थी। उसके बावजूद दिल्ली पुलिस ने सिंघु बॉर्डर पर बैरिकेड लगाकर वहां से गुजर सभी किसान नेताओं की गाड़ियों की वीडियोग्राफी कराने के साथ ही उनके नंबर भी रजिस्टर में दर्ज किए। वहीं किसानों की सैकड़ों गाड़ियों के नेशनल हाईवे (एनएच-44) पर पहले ही जाम से त्रस्त वाहन चालकों की मुसीबत और बढ़ गई। करीब पांच घंटे तक जाम की स्थिति में वाहनों के साथ एंबुलेंस भी फंस गई थी।

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एनएच-44 पर बीसवां मील से कुंडली बॉर्डर तक सात फ्लाईओवर का निर्माण करने के साथ ही हाईवे का चौड़ीकरण किया जा रहा है। जिसके चलते यहां पहले ही जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में सोमवार को किसानों के दिल्ली जाने के दौरान हाईवे पर जाम की स्थिति बढ़ गई। जिससे सैकड़ों वाहन जाम में फंस गए।

 

जिससे काफी यात्री तो बीच सडक़ उतरकर दो किलोमीटर तक पैदल चलकर अपने गंतव्य तक पहुंचने को मजबूर हुए। दिल्ली में वाहनों के प्रवेश के साथ ही किसानी झंडा लगाकर जा रहे सभी वाहनों की वीडियोग्राफी कर पुलिस उनके नंबर नोट करती नजर आई। हालांकि किसी वाहन को रोका नहीं गया।
 

जाम में आधा घंटा तक एंबुलेंस फंसी रही, मरीज तड़पता रहा
कुंडली बॉर्डर पर लगे जाम के दौरान आधा घंटा तक एंबुलेंस फंसी रही। एंबुलेंस के जरिए हड्डी रोग पीड़ित को सोनीपत से फोर्टिस अस्पताल दिल्ली ले जाया जा रहा था। जब एंबुलेंस कुंडली बॉर्डर के पास पहुंची तो वहां जाम में फंसी रही। एंबुलेंस चालक ने बताया कि जाम के दौरान रास्ता दिया जाए ताकि जल्द से जल्द मरीज को अस्पताल पहुंचाया जा सके। करीब आधा घंटा तक जाम में फंसा हुआ हूं, मरीज इलाज के लिए तड़प रहा है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

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हाईवे पर लगे जाम में फंसे वाहन। संवाद- फोटो 


 

क्या बोले किसान नेता
जंतर-मंतर पर भारी संख्या में किसान जा रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से किसान आंदोलन समाप्त करवाते समय जो वादे किए थे, उनमें से सरकार ने एक भी वादा पूरा नहीं किया हैं। लखीमपुर खीरी कांड मामले में कार्रवाई ढीली चल रही है। साथ ही एमएसपी पर कानून नहीं बनाया गया है। जिसके चलते किसान वर्ग में रोष है। -सतीश नंबरदार, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन नंबरदार

 

हाईवे पर लगे जाम में फंसी एंबुलेंस। फोटो -  संवाद


सरकार की ओर से किसान की मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है। एमएसपी कानून बनाने को लेकर गठित की गई कमेटी में सरकार ने किसान नेताओं को शामिल तक नहीं किया। लखीमपुर खीरी कांड में मारे गए किसानों को शहीद का दर्जा तक नहीं मिला। जंतर मंतर पर किसान महापंचायत के दौरान जिस तरह के फैसले लिए जाएंगे और उसी के तहत देशभर में आंदोलन होंगे। -राज सिंह, प्रधान किसान यूनियन खरखौदा
 

किसान आंदोलन के दौरान सरकार के साथ जो फैसले हुए थे उनको सरकार ने अभी तक लागू नहीं किया है। मैं किसानों को लेकर हिसार के गांव खेदड़ से केएमपी एक्सप्रेस वे के पास पहुंची हूं। सरकार से मांग है कि किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे। साथ ही अन्य कई मांगों को लेकर आंदोलन तेज किया जाएगा। -रीमन, प्रवक्ता भारतीय किसान नौजवान यूनियन हिसार


किसानों के साथ सरकार ने नाइंसाफी की है। अब अगर जल्द ही सरकार ने उनकी सुनवाई नहीं की तो वह आंदोलन को तेज करेंगे। सितंबर माह के पहले सप्ताह में कुंडली क्षेत्र में बैठक बुलाई गई है। अगर सरकार अब नहीं मानी तो बैठक में आंदोलन को व्यापक बनाने पर विचार विमर्श किया जाएगा। किसानों की लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। -राजेश दहिया, राष्ट्रीय प्रवक्ता भाकियू अंबावता।

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सरकार किसानों के साथ धोखा कर रही है। जिन किसानों को एमएसपी गारंटी कानून बनाने के लिए सरकार ने कमेटी में शामिल किया, वह किसान आंदोलन के विरोधी रहे। हमारी मांग है कि सरकार की ओर से किसानों को कर्ज मुक्त किया जाए। गन्ने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया जाए। मिल से बकाया राशि दिलाई जाए। किसानों की मुख्य मांगों में लखीमपुर खीरी नरसंहार के पीड़ित किसान परिवारों को इंसाफ, जेलों में बंद किसानों की रिहाई व किसानों की हत्या के मामले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी की गिरफ्तारी से संबंधित है। इसके अलावा स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के अनुसार एमएसपी कानून की गारंटी, देश के सभी किसानों को कर्ज मुक्त, बिजली बिल 2022 रद्द करने व गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने को लेकर भी किसान मांग की है। वहीं, अग्निपथ योजना का विरोध भी किसानों ने किया। -अभिमन्यु कोहाड़, अध्यक्ष भारतीय किसान नौजवान यूनियन

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