सोनीपत। सीमा विवाद की आग में यूपी व हरियाणा के किसान 52 साल से झुलस रहे हैं। यूपी व हरियाणा के किसानों की करीब 4500 हेक्टेयर जमीन यमुना खादर में सीमा विवाद में फंसी हैं और यह विवाद 1968 से चल रहा है। दोनों तरफ के करीब 47 गांव के किसानों के बीच यह सीमा विवाद चल रहा है और अभी तक 27 बार खूनी संघर्ष होने से कई की जान जा चुकी है। हरियाणा व यूपी के शासन-प्रशासन ने विवाद को सुलझाने में कभी रुचि भी नहीं दिखाई है। वह बवाल होने पर कुछ सक्रिय होते हैं और उसके बाद उसको भूल जाते हैं। दिसंबर 2019 में विवाद निपटाने के लिए कदम बढ़ाते हुए सीमांकन कराया गया, लेकिन एक महीने भागदौड़ करके सब कुछ फाइल में दबा दिया गया। इस तरह के हालात देखते हुए विवाद निपटता नहीं दिख रहा है।
हरियाणा के सोनीपत व पानीपत जिलों के किसानों का यूपी के बागपत व शामली जिले के किसानों संग करीब 52 साल से जमीन को लेकर सीमा विवाद चल रहा है। हरियाणा व यूपी के बीच यमुना है और इससे ही दोनों प्रदेशों का सीमांकन होता है। यमुना की धार कई बार बदलने से हरियाणा की जमीन यूपी की ओर चली गई तो यूपी की जमीन हरियाणा की ओर आ गई। उस जमीन पर कब्जे को लेकर ही यह विवाद चल रहा है। इस विवाद के बढ़ने पर केंद्र ने 1974 में तत्कालीन कृषि मंत्री उमाशंकर दीक्षित की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया और दीक्षित अवार्ड के तहत दोनों प्रदेश की जमीन पर पिलर लगवाए गए। उस समय यमुना की धार को आधार मानकर सीमांकन कर दिया गया था। उस समय तय हुआ था कि यूपी के किसानों की जमीन हरियाणा की ओर है तो उसपर हरियाणा के किसान काबिज होंगे और हरियाणा के किसानों की जमीन यूपी की ओर है तो उसपर यूपी के किसान काबिज होंगे। उसपर कब्जा दिलवाने की कार्रवाई प्रशासन को करनी थी, लेकिन उसपर कब्जा नहीं दिलवाया गया और यह विवाद लगातार बढ़ता गया। इस विवाद को लेकर कई बार खूनी संघर्ष तक हुआ है और इसमें करीब 27 मुकदमे भी दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक यह विवाद नहीं सुलझा है। इस विवाद को सुलझाने के लिए कई बार दोनों प्रदेशों के अधिकारियों की बैठक भी हुई, लेकिन उसके बावजूद किसी ने रुचि नहीं दिखाई।
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दिसंबर 2019 में सीमांकन कराने के बाद भी पिलर नहीं लगाए गए
यूपी-हरियाणा के किसानों के बीच सीमा विवाद में लगातार खूनी संघर्ष होने पर दिसंबर 2019 में यूपी के बागपत जिले में सोनीपत, पानीपत, बागपत, शामली जिले के अधिकारियों की बैठक हुई। उस बैठक में निर्णय लिया गया कि सीमांकन कराया जाएगा और उसपर पिलर लगाकर विवाद खत्म किया जाएगा। उस समय करीब एक सप्ताह तक सीमांकन का काम चला, लेकिन सीमांकन करके पिलर लगाने व विवाद निपटाने में किसी ने रुचि नहीं दिखाई। यह मामला केवल फाइलों में दबकर रह गया।
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सोनीपत व बागपत के इन गांवों के बीच चल रहा विवाद
सोनीपत के बेगा, चंदौली, पबनेरा, ग्यासपुर, मीमारपुर, जैनपुर, टिकौला, नांदनौर, असदपुर, गढ़मिर्कपुर, मनौली, दहीसरा, भैरा बांकीपुर आदि गांव के किसान सीमा विवाद की आग में झुल रहे है तो यूपी के बागपत जिले के बागपत, निवाड़ा, सिसाना, गौरीपुर जवाहरनगर, नैथला, निनाना, लुहारी, कौताना, खेड़ी प्रधान, खेड़ा इस्लामपुर, छपरौली, टांडा, काकौर, बदरखा, जागौस, काठा, पाली, नंगला बहलोलपुर, मवीकलां, सुभानपुर, सांकरौद आदि गांव सीमा विवाद का दंश झेल रहे हैं। किसान लगातार अधिकारियों के पास चक्कर काट रहे है। उसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती है और हर बार केवल आश्वासन मिलता है।
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फसल बुआई व कटाई के समय होता है सबसे ज्यादा संघर्ष
सीमा विवाद में यूपी व हरियाणा के किसानों के बीच फसल बुआई व कटाई के समय सबसे ज्यादा संघर्ष होता है। 1997 में सांकरौद के यमुना खादर में सोनीपत के भैरा बांकीपुर के ओमपाल सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसको लेकर काफी बवाल हुआ था और अफसरों को बंधक बनाया गया था तो अफसरों तक पर हत्या का मुकदमा हो गया था। 1997 में यमुना खादर में दोनों तरफ के किसानों के बीच हुई फायरिंग में बागपत के कुर्डी गांव के विशंभर की मौत हो गई थी। 1997 व 98 में खुर्मपुर व नंगला बहलोपुर गांव के किसानों के बीच जमकर बवाल हुआ था और उस समय कई को गोली लगी थी। उसके बाद भी जाजल व निवाड़ा के किसानों के बीच बवाल हुआ तो खुर्मपुर व नंगला बहलोलपुर के किसानों में झगड़ा हुआ। इनके अलावा भी फसल बुआई व कटाई के समय बवाल होता रहा है।
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हरियाणा व यूपी के किसानों के बीच सीमा विवाद काफी पुराना है। जिसमें कई बार किसानों से कहा गया है कि राजस्व रिकार्ड में जमीन पर काबिज होने वाले का हक होता है और किसी को कोई आपत्ति है तो वह विवाद नहीं करके आपस में बैठकर या कानूनी तौर पर मामले को निपटा सकता है। प्रशासन की तरफ से विवाद निपटाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
श्यामलाल पूनिया, डीसी, सोनीपत