पुरखास रोड आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) पर वाहन दौड़ाने का सपना अभी पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है। इस आरओबी का निर्माण दो साल में पूरा किया जाना था। बाद में दो वर्ष का समय भी बढ़ाया गया, लेकिन चार साल बाद भी इसका निर्माण कार्य महज 70 फीसदी पूरा हो सका है। इतना ही नहीं वर्तमान में तीन माह से काम बंद ही पड़ा है। उधर, एचएसआरडीसी के अधिकारी भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। निर्माण कार्य अधर में लटकने से यह मार्ग बंद पड़ा है और शहर में आने के लिए लोगों को करीब 10 किलोमीटर का चक्कर काटकर आना पड़ता है, जिससे समय के साथ ईंधन भी अधिक खर्च हो रहा है। इसका निर्माण न होने से 12 गांवों के लोगों को परेशानी हो रही है।
दो बार में दो वर्ष का समय बढ़वाया
पुरखास रोड आरओबी का शिलान्यास 27 जून, 2013 को तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किया था। फाटक संख्या-29 पर 47 करोड़ 59 लाख रुपये की लागत से बनने वाले रेलवे ओवरब्रिज को दो वर्ष में पूरा किया जाना था। इसका निर्माण करने का टेंडर एमबीएल कंस्ट्रक्शन कंपनी ने लिया था, लेकिन तय समय में निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। इस पर कंपनी ने दो बार में दो वर्ष का समय और बढ़वा लिया था। वह समय सीमा भी अब अप्रैल माह के अंत में पूरी हो रही है। उसके बावजूद यहां निर्माण कार्य 70 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। पहले तो अधिकारी रेलवे फाटक बंद न होने का रोना रोते रहे, लेकिन फाटक बंद होने के बाद भी काम को गति नहीं मिल सकी।
इस तरह आगे बढ़ा काम
चार साल से निर्माणाधीन पुरखास रोड ओवरब्रिज का निर्माण जनवरी, 2015 तक पूरा करना था। पुल का निर्माण अधर में लटका तो उसके बाद मार्च, 2016 तक की तिथि निर्धारित की गई। उस समय सीमा में भी काम पूरा नहीं पाया तो फिर अक्तूबर, 2016 तक का समय बढ़ाया गया। उस दौरान भी काम अधर में ही रहा। जिस पर अप्रैल, 2017 तक की सीमा रखी गई। वह भी अब चंद रोज में पूरी होने वाली है।
इस तरह होना है ओवरब्रिज का निर्माण
निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज की लंबाई 1037 मीटर और चौड़ाई साढ़े सात मीटर है। ओवरब्रिज के निर्माण के लिए 27 पिलर लगाए जा चुके हैं। रेलवे की ओर से सभी 20 गार्डर भी पिलरों पर रख दिए, लेकिन नट बोल्ट अभी तक कसे नहीं जा सके हैं। इसके बाद स्लैब डाले जाने काम होना बाकी है। पुल के दोनों ओर रिटेनिंग वॉल का कार्य अधर में लटका हुआ है।
शहर आने वालों की बढ़ी मुसीबत
इस फ्लाईओवर के मार्ग पर जाहरी, थरिया, शहजादपुर, उल्देपुर, ठरू, सांदल कलां, सांदल खुर्द, पुरखास, पांची, उद्देशीपुर सहित अन्य गांव लगते हैं। वहां के ग्रामीण फाटक संख्या-29 का प्रयोग कर शहर की तरफ आते थे, लेकिन इस फाटक के बंद होने पर आरओबी का निर्माण शुरू हुआ। इसके बाद से लोगों को करीब 10 किलोमीटर घूमकर शहर की तरफ आना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। उसकी समस्या को सुलझाने के लिए एचएसआरडीसी के अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब तक नहीं दे रहे हैं।
वर्जन
पुरखास रोड पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर पर गॉर्डर लगाने करने का काम रेलवे की ओर से किया जा रहा है। विभाग की तरफ रिटेनिंग वॉल का काम एमबीएल कंपनी को दिया गया है। पिछले तीन माह से कंपनी की ओर से यहां कोई काम नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के एसई एमबीएल कंपनी के अधिकारियों को काम पूरा करने के निर्देश दे चुके हैं। जून माह तक कंपनी को निर्माण कार्य पूरा करने को कहा गया है।
-जगवीर सिंह काजला, डीजीएम, एचएसआरडीसी