सोनीपत। नागरिक अस्पताल में चार दिन से हेपेटाइटिस सी (काला पीलिया) की दवा खत्म हो चुकी है। दवा न मिलने के कारण मरीजों को वापस लौटना पड़ रहा है। हेपेटाइटिस सी के मरीजों को अस्पताल से एक बार में तीन माह की दवा दी जाती है। हेपेटाइटिस सी की दवा न मिलने से मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। दवा कब आएगी, इसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है।
जिले में हेपेटाइटिस के मरीज लगातार मिल रहे हैं। हर महीने 200 से 250 नए मरीज सामने आते है। इस समय जिले में 1200 से अधिक मरीजों का उपचार चल रहा है। हेपेटाइटिस सी के मरीजों का जिला अस्पताल में पंजीकरण किया जाता है। इसके बाद उन्हें निशुल्क दवा उपलब्ध कराई जाती है। हेपेटाइटिस सी की दवा चार दिन से खत्म है। दवा न मिलने से मरीजों को निराश होकर वापस जाना पड़ रहा है। दवा का कोर्स पूरा होने के तीन माह बाद भी जांच जरूरी है। यह खतरनाक बीमारी मां से बच्चे में भी आ सकती है, अगर समय रहते इसका उपचार करा लिया जाए तो बच्चे में आने से रोका जा सकता है। जिन मरीजों का लीवर खराब हो जाता है, उन मरीजों को छह महीने दवाई दी जाती है।
ऐसे होती है हेपेटाइटिस की पहचान
काफी समय पर पीलिया रहना, बार-बार उल्टी लगना व भूख न लगना हेपेटाइटिस के लक्षण हैं। ऐसे में लोगों को अपना इलाज तुरंत शुरू कराना चाहिए। प्राथमिक जांच में ही चिकित्सक मरीज को हेपेटाइटिस होने की पुष्टि कर देते हैं। इसके बाद खानपुर कलां स्थित बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीज को काला पीलिया की स्थिति व जिनोटाइप टेस्ट कराया जाता था। जांच रिपोर्ट में पुष्टि के बाद मरीज का उपचार शुरू किया जाता है। मरीज का तीन माह तक उपचार चलता है, अगर लीवर खराब है तो मरीज को छह माह तक दवा खानी पड़ती है। करनाल से दवाई आने के बाद हेपेटाइटिस सी के पुराने मरीजों को वितरित कर दी जाएगी।
हेपेटाइटिस को लेकर जागरूकता जरूरी
हेपेटाइटिस सी और बी को लेकर लोगों में जागरूकता जरूरी है। जिस मरीज को काला पीलिया है, उसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। साथ ही जो लोग नशा करते हैं वह अपने साथियों के साथ एक ही सिरिंज का प्रयोग करते हैं। इसलिए नशे से दूर रहना चाहिए।
हेपेटाइटिस सी की दवाएं खत्म होने का मामला संज्ञान में नहीं आया है। इसकी जांच कराकर अस्पताल में जल्द उपलब्ध करा दी जाएंगी। इसके बाद मरीजों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
- डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन