खरखौदा (सोनीपत)। डंकी रूट से अमेरिका पहुंचने के लिए समुद्र में किश्ती से सफर करना पड़ा। तेज लहरों के बीच 200 किमी की गति से नाव में सफर किया। हर समय जान जाने का भय बना रहता था। पनामा के जंगल सबसे खतरनाक थे, जहां तीन दिन तक लगातार पैदल चलना पड़ा। कई लोग बीमार हुए, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। जिनकी हालत ज्यादा बिगड़ी, उन्हें बीच रास्ते में ही छोड़ दिया गया। यह आपबीती अमेरिका से डिपोर्ट होकर लाैटे सोनीपत के फरमाणा गांव के अंकित ने बयां की। अमेरिका से डिपोर्ट होकर लौटा खरखौदा के गांव फरमाणा का अंकित ने बताया कि परिवार की आर्थिक संपन्नता का सपना संजोकर वह अमेरिका गया था। अंकित के सपने को पूरा करने के लिए परिवार ने अपनी तीन बीघा जमीन तक बेच दी। अमेरिका पहुंचने में अंकित को डेढ़ माह का समय लगा। जब वहां पहुंचा तो अमेरिकी एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया और एक महीने तक जेल में रखा। तीन माह बाद ही अंकित को अमेरिका से भारत वापस भेज दिया।
12वीं कक्षा पास अंकित को अमेरिका जाते ही पकड़ लिया गया था। अंकित ने बताया कि अमेरिका भेजने के लिए दलालों ने उनसे भारी रकम की मांग की थी। इसमें करीब 50 लाख रुपये खर्च हुए। 20 लाख रुपये गयाना में, 10 लाख निकारागुआ और 2 लाख रुपये तिजुआना बॉर्डर पार करने के दौरान दिए। अब परिवार पर दोहरी मार पड़ी है।
पिता का हो चुका निधन, मां हैं दिव्यांग
अंकित ने बताया कि उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में भाई के अलावा दिव्यांग मां हैं। उनके भाई फरमाणा के बस स्टैंड पर फल बेचकर परिवार का गुजर बसर करते हैं। परिवार के पास पहले 10 बीघा (दो एकड़) जमीन थी।
टूरिस्ट वीजा पर भेजने का दिया था झांसा
अंकित डंकी रूट से दलालों के चक्कर में पड़कर अमेरिका गया था। उसे टूरिस्ट वीजा पर भेजने का झांसा दिया था, लेकिन बाद में उसे खतरनाक डंकी रूट से अमेरिका भेजा गया।
5 नवंबर को घर से निकला था अंकित
अंकित ने बताया कि वह फरमाणा गांव से 5 नवंबर, 2024 को निकला था और तीन दिन बाद मुंबई पहुंचा। वहां से नीदरलैंड के एम्स्टर्डम की फ्लाइट पकड़ी। एम्स्टर्डम से हवाई यात्रा कर कैरेबियाई देश त्रिनिदाद एंड टोबैगो के पोर्ट ऑफ स्पेन पहुंचा। वहां से वह गयाना गया और डंकी रूट पर सफर शुरू हुआ। इसके बाद ब्राजील, बोलीविया और पेरू के अलग-अलग शहरों से इक्वाडोर होते हुए कोलंबिया पहुंचा। कोलंबिया से समुद्री रास्ते नाव के जरिए पनामा जंगल तक सफर किया। पनामा के जंगलों में तीन दिन पैदल चलने के बाद वह कोस्टा रिका पहुंचा। वहां पुलिस ने पकड़ लिया और देश छोड़ने का आदेश दिया। इसके बाद वह निकारागुआ, होंडुरास और ग्वाटेमाला होते हुए मैक्सिको पहुंचा। तिजुआना बॉर्डर से अमेरिकी सीमा में दाखिल होते ही पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
अंकित के अनुसार, अमेरिका में पकड़े जाने के बाद उसे 31 दिन तक हिरासत में रखा गया। वहां मानसिक प्रताड़ना मिली। तीन दिन और तीन रात तक सोने नहीं दिया गया। खाने के लिए कच्चा-पक्का खाना ही दिया गया। सर्दी के बावजूद चादर नहीं दी गई, बल्कि पॉलिथीन की एक पतली शीट दी गई थी।