पत्रकारों से बातचीत करते हुए आंदोलनकारी संत गोपालदास।
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आंदोलनकारी संत गोपालदास ने कहा कि गाय को बचाने का दावा करने वाली सरकार के कानून केवल घोषणाओं तक सीमित है। गाय हर रोज कूड़ा-कचरा खाकर मर रही है। उनकी सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं है। अगर गाय को कूड़ा-करकट खाकर ही मरना है तो सरकार उन्हें एक साथ मरवा दें, ताकि गाय को लेकर देश में कोई आंदोलन न हो। सीएम पर निशाना साधते हुए संत गोपालदास ने कहा कि अभी तक प्रदेश में कहीं भी गोचरान की भूमि खाली नहीं हुई है, इसके लिए सीएम मनोहर लाल भी जिम्मेदार हैं क्योंकि सरकार की ओर से भूमि खाली कराने को कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।
संत गोपालदास शुक्रवार को रेलवे रोड स्थित पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने गाय को बचाने के लिए कानून बनाए हुए हैं, लेकिन इन्हें पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है। राज्यों की सीमावर्ती पुलिस चौकियां केवल नाम के लिए खोली गई हैं। खुलेआम गाय की तस्करी हो रही है। हालात यह हैं कि अगर कोई तस्करों को पुलिस के हवाले कर भी देता है तो कुछ देर बाद ही उन्हें छोड़ दिया जाता है। इस मामले में सरकार की भी कोई जवाबदेही नहीं है।
ड्रोन के लिए 230 करोड़, गाय संरक्षण के लिए केवल तीन करोड़
ड्रोन के लिए तो 230 करोड़ का बजट पास किया जा रहा है और गाय संरक्षण संवर्धन के लिए केवल तीन करोड़ पास किए जाते हैं। वहीं, गोचरान की जमीन की बोली लगवाकर 2,378 करोड़ रुपये इकट्ठा कर लिया, लेकिन प्रदेश की गोचरान की साढ़े चार लाख एकड़ जमीन को आजतक खाली नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि सरकार के डेयरी प्रोडक्शन को प्रमोट करने की घोषणा एक छलावा है। संत गोपालदास ने सरकार से गोचरान की जमीन से इकट्ठा किए गए 2,378 करोड़ रुपये को लेकर जवाब मांगा है। इसके अलावा सरकार पारदर्शिता तय करे कि अगर आदमी के लिए फूड सिक्योरिटी बिल आ सकता है तो गाय के लिए कैटल फूड सिक्योरिटी बिल क्यों नहीं आना चाहिए। सरकार को इसके लिए इच्छाशक्ति दिखानी होगी। गोरक्षकों व तस्करों की चर्चा से गाय का हित नहीं होगा। इसके अलावा सरकार को आयुष विभाग में गाय के स्वावलंबन के लिए कंट्रोल रेट पर औषधि को प्रमोट करना चाहिए।