सोनीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विमल सपरा ने राहगीरों से लूट का षड्यंत्र रचते गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। तीनों को सात-सात साल कैद व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। तीनों के कब्जे से तीन तमंचे व कारतूस बरामद किए गए थे। दो दोषी दिल्ली व एक उत्तराखंड का रहने वाला है।
एसआईटी में नियुक्त रहे तत्कालीन एएसआई जितेंद्र कुमार ने 8 दिसंबर 2017 को सिटी थाना पुलिस को बताया था कि वह अपनी टीम के साथ रात को गोहाना बाईपास पर गश्त कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली थी कि तीन युवक राहगीरों को लूटने का षड्यंत्र रच रहे हैं। इस पर टीम तुरंत रेलवे ओवरब्रिज के पास पहुंच गई थी। टीम ने एएसआई बिजेंद्र को सादे कपड़ों में ओवरब्रिज की तरफ भेजा था। जब वह वहां से गुजरने लगे थे तो तीनों युवकों ने उन्हें पकड़ लिया था। इसी बीच पुलिस टीम ने छापा डालकर तीनों को काबू कर लिया था।
युवकों की तलाशी में उनके पास से तीन तमंचे व तीन कारतूस बरामद किए गए थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। आरोपियों की पहचान मूलरूप से उत्तराखंड के अलमोड़ा जिला के गांव कुंधार व घटना के समय दिल्ली के पहलादपुर निवासी सुशील उर्फ पवन, दिल्ली के गांव बरवाला निवासी अक्षय उर्फ आशू व विनय के रूप में दी थी। पुलिस ने आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया था।
मामले की सुनवाई करते हुए एएसजे विमल सपरा ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया है। तीनों को सात-सात साल कैद व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी।