संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा । डॉ. भीमराव आंबेडकर भवन एवं शिक्षा संस्थान के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को रोष मार्च निकाला। आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार के आत्महत्या मामले की निष्पक्ष जांच सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि वाई पूरण के सुसाइड नोट में नामजद सभी वरिष्ठ अधिकारियों को पदमुक्त कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को उपमंडल कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम नायब तहसीलदार अचिन कुमार को दो ज्ञापन सौंपें। पदाधिकारियों ने न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने और जातिगत भेदभाव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
एक ज्ञापन में संस्था ने देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीआर गवई पर जूता फेंकने की घटना की निंदा की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह केवल मुख्य न्यायाधीश के सम्मान पर हमला नहीं है बल्कि पूरी न्यायपालिका, संविधान और डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा पर प्रहार के समान है।
उन्होंने कहा कि घटना की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। न्यायपालिका की गरिमा हर हाल सुरक्षित रहनी चाहिए।
दूसरे ज्ञापन में हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार की आत्महत्या के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की। संस्था के प्रधान आजाद सिंह दहिया ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से जातिगत उत्पीडऩ और मानसिक प्रताडऩा के चलते अधिकारी को अपनी जान गंवानी पड़ी।
संस्था के पूर्व प्रधान प्रीतम खोखर ने कहा कि जब कोई अनुसूचित जाति के अधिकारी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो उनके साथ षड्यंत्र किया जाता है। इस दौरान सुनील सिंहमार, पार्षद हरिओम, बलवान कंवाली, सरपंच कर्मबीर, जयनारायण, रामफल मेहरा, सूबेदार सूरत, जिले सिंह और अतर सिंह मौजूद रहे।