सोनीपत। कुंडली मानेसर पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस-वे पर वाहन चालकों के लिए रात का सफर मुश्किल और खतरों से भरा है। यहां पर सूर्यास्त के बाद अंधेरा छा जाता है। यहां लगी स्ट्रीट लाइट महज शो-पीस बनकर रह गई है। तीन साल में कुछ दिन ही यह लाइट जली होंगी। 1873 करोड़ रुपये खर्च कर तैयार किए गए कुंडली से मानेसर तक करीब 83 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे पर रात के अंधेरे में हादसे का डर बना रहता है। अब सर्दी का मौसम शुरू हो गया है। ऐसे में शहरों व गांवों के बाहरी छोर पर वाहनों को फर्राटा भरने के लिए बनाए गए इस एक्सप्रेस-वे पर रात को अक्सर कोहरा छाएगा। जिसमें हादसों का भय ज्यादा बढ़ जाएगा।
केएमपी का निर्माण पत्थर वर्ष 2003 में हरियाणा के तत्कालीन सीएम ओपी चौटाला ने लगाया था, लेकिन इसका काम 2006 में शुरू किया गया था। लेकिन बाद में फिर से रोक दिया गया। वर्ष 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी ने केजीपी के साथ इसका शिलान्यास किया था और इसका काम दोबारा शुरू हो सका था। पलवल से मानेसर तक यह वर्ष 2016 में शुरू हो गया था, लेकिन मानसेर से कुंडली तक 19 नवंबर 2018 को शुरू किया गया था। यह एक्सप्रेस वे सोनीपत में कुंडली से शुरू होकर दिल्ली के चक्कर लगाते हुए खरखौदा, बहादुरगढ़, मानेसर, सोहना से होते हुए पलवल में खत्म होता है, जिसपर करीब 1873 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। भारी भरकम राशि खर्च करने के बावजूद तीन साल बाद भी केएमपी पर रात का सफर सुहावना नहीं हो सका है। इसके उद्घाटन के दौरान सोलर सिस्टम भी लगाया गया था। लेकिन अब तक न तो स्ट्रीट लाइट बिजली से चालू हुई और न ही सोलर सिस्टम से उजाला फैला सकी। शुरुआत में कुछ माह जेनरेटर से इन्हें जगमग किया गया था, लेकिन करीब सवा दो साल से जेनरेटर भी नहीं चलाया गया। लाइट बंद होने से रात होते ही यहां अंधेरा पसर जाता है। एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की गति सीमा 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा होने के चलते यहां वाहन तेज रफ्तार में दौड़ते हैं, लेकिन अंधेरा रहने से उन्हें हादसा होने का डर सताता रहता है।
कोहरे में बढ़ जाएगी मुसीबत
सर्दी का मौसम शुरू हो गया है। ऐसे में रात को अक्सर कोहरा छाएगा। एक्सप्रेस-वे पर पसरे अंधेरे के बीच कोहरा ज्यादा बड़ी मुसीबत बन जाता है। रात को स्ट्रीट लाइट न होने से वाहनों की हेडलाइट के सहारे कोहरे के बीच एक्सप्रेस-वे का सफर काफी खतरनाक साबित हो सकता है। कोहरे को देखते हुए यहां स्ट्रीट लाइट जल्द रोशन की जानी चाहिए। कोहरे व अंधेरे के कारण यहां हर दिसंबर-जनवरी में 20 से 25 वाहन भिड़ जाते हैं।
महंगा टोल देने के बाद भी नहीं आधुनिक सुविधा
केएमपी पर यात्रा करने के लिए लोगों को भारी भरकम टोल देना पड़ता है। उसके बावजूद एक्सप्रेस-वे पर अंधेरे में सफर करना पड़ रहा है। केएमपी पर किलोमीटर के अनुसार टोल वसूला जाता है। वाहन चालक जितने किलोमीटर यात्रा करता है उतना ही टोल देना पड़ता है। ऐसे में टोल देने के बाद भी लोग इस मार्ग पर डरते हुए यात्रा करने को मजबूर है।
केएमपी हुए हादसे
-2 अप्रैल को कैंटर की टक्कर से कार सवार झज्जर के दो लोगों की मौत
-23 मार्च को बाइक सवार सिपाही की मौत
-12 मार्च को मोपेड़ सवार की मौत
-9 फरवरी को बाइक सवार की मौत
-2 नवंबर, 2020 को सड़क हादसे में छह लोगों की मौत
-20 सितंबर, 2020 को कैंटर सवार की मौत
केएमपी टोल रोड होने के बावजूद इसके हालात बदतर हैं। यहां रात होते ही अंधेरा पसर जाता है। ऐसे में इस मार्ग पर रात को सफर के दौरान हादसे का भय बना रहता है। प्रदेश सरकार ने इस पर स्ट्रीट लाइट तो लगवा रखी है, लेकिन वह बंद रहती है। इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
- राहुल, मैक्स हाईट हाउसिंग सोसाइटी सोनीपत
केएमपी पर रात को सफर के दौरान अंधेरे में दिक्कत होती है। इस एक्सप्रेस-वे पर गति सीमा को देखते हुए स्ट्रीट लाइटों का होना जरूरी है। रात को सफर के दौरान हादसे का डर बना रहता है।
- संदीप, सोनीपत
केएमपी पर सफर करना बेहद खतरनाक है। यहां किसी तरह की सुविधा नहीं है। सड़क पूरी तरह समतल नहीं है। ऐसे में परिवार के साथ सफर करने में डर सताता रहता है।
- बलवान सिंह, दिल्ली
केएमपी का नाम तो बहुत सुना था, लेकिन इस पर सफर करना बेहद खराब अनुभव रहा। यहां पर किसी तरह की सुविधा नहीं हैं। इस पर सफर के दौरान लगातार परेशानी से जूझना पड़ता है।
- बलविंद्र सिंह, पंजाब
वर्जन-
केएमपी पर स्ट्रीट लाइट की सुविधा को जल्द सुचारु किया जाएगा। इलेक्ट्रिकल शाखा ने इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। जल्द लोगों की समस्या दूर होगी।
सुरेंद्र सिंह, एक्सईएन, एचएसआईआईडीसी