खरखौदा (सोनीपत)। उपमंडल नागरिक अस्पताल में तत्कालीन वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किए जाने के मामले में हरियाणा राज्य महिला आयोग ने संज्ञान लिया है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) को मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
खरखौदा के सरकारी अस्पताल की तत्कालीन एसएमओ डाॅ. आशा सहरावत ने जब अस्पताल में लापरवाह स्टाफ सदस्यों पर सख्ती दिखानी शुरू की तो वह उनके खिलाफ लामबंद हो गए थे। यही नहीं चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी उनके खिलाफ धरने पर बैठ गए थे। यह धरना 21 दिन तक चला था। तत्कालीन सिविल सर्जन डाॅ. जयकिशोर ने मामले को सुलझाने का प्रयास किया था, लेकिन बात नहीं बनी। बाद में सरकार ने चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भी अस्पताल से तबादले कर दिए थे। उसके बाद में जिला नागरिक अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दीपक व उप सिविल सर्जन डाॅ. आशा सहरावत में विवाद हुआ था। डाॅ. आशा सहरावत ने आरोप लगाया कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दीपक अपने मोबाइल से उनका वीडियो बनाने लगा। बाद में दीपक ने उसे थप्पड़ मारे जाने का आरोप लगाया था। यह वीडियो उस समय इंटरनेट मीडिया पर काफी प्रसारित हुआ था। मामला पुलिस तक पहुंचा था। शुक्रवार को खरखौदा के अस्पताल में धरने-प्रदर्शन मामले की सुनवाई हुई। सिविल सर्जन डाॅ. ज्योत्सना ने आयोग के समक्ष बताया कि खरखौदा के सरकारी अस्पताल में कोई धरना-प्रदर्शन हुआ ही नहीं। इस पर महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने आदेश दिए हैं कि इस मामले की विस्तृत जांच होगी। किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और निष्पक्ष जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।