संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। दिव्यांगता का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर सरकारी सोसाइटी में प्लॉट लेने व नौकरी प्राप्त करने के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। इस मामले में अदालत के आदेश पर पुलिस ने सोनीपत के तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. जेएस पूनिया व एक महिला चिकित्सक को जांच के दायरे में लाने का काम किया है। पुलिस अब सीएमओ व महिला चिकित्सक से पूछताछ कर मामले में उनके शामिल होने की सत्यता का पता लगाने का प्रयास करेगी।
गांव रायपुर निवासी सोनिया ने बताया था कि उनकी शादी शास्त्री कालोनी सोनीपत में एक आरोपी व्यक्ति के साथ हुई थी। उनके पति ने अपने पिता के साथ मिलकर फर्जी तरीके से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की है। आरोप है कि पति की जन्मतिथि जनवरी 1984 है, जबकि ससुर ने फर्जी तरीके से जन्मतिथि जनवरी 1982 करवाकर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में एक प्लॉट सामान्य वर्ग के तहत लिया गया। यही नहीं पति ने अपने पिता के साथ मिलकर 100 फीसदी स्वस्थ होते हुए भी नागरिक अस्पताल से दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाकर विकलांगता कोटे के तहत हाउसिंग बोर्ड फरीदाबाद व हुडा फरीदाबाद में दो प्लॉट लिए। दोनों प्लॉट के लिए दो अलग अलग प्रमाण पत्र बनवाए। एक 90 फीसदी व दूसरा 85 फीसदी दिव्यांगता का प्रमाणपत्र बनवाया। इसके अलावा पति ने अपने पिता के साथ मिलकर जिला शिक्षा अधिकारी सोनीपत व स्कूल प्रबंधन के साथ मिलीभगत कर स्कूल से अनुभव प्रमाण पत्र भी बनवाया है।
महिला का आरोप है कि उनके ससुर डीईओ कार्यालय में बतौर चालक कार्यरत थे। उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक ही समय ओर एक वर्ष के अनुभव प्रमाण पत्र पर अपने बेटे को नौकरी दिलवाई। निजी स्कूल में अध्यापक के पद पर कार्यरत होते हुए ओपन स्कूल से 10वीं कक्षा के फार्म भरकर अपनी जन्मतिथि एक जनवरी 1989 करवा ली। इस प्रकार फर्जीवाड़ा करते हुए सरकारी सोसाइटी में प्लॉट लिए और नौकरी भी प्राप्त की है।
मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को भेजी थी। पुलिस ने शिकायत पर 5 अक्तूबर 2022 को धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। शिकायत कर्ता ने मामले में तत्कालीन सिविल सर्जन, जिला शिक्षा अधिकारी, स्कूल प्रबंधन सहित कई पर मिलीभगत के आरोप लगाए थे। मामले में अब पुलिस ने तत्कालीन सीएमओ डॉ. जेएस पूनिया व महिला चिकित्सक डॉ. सुमन माथुर को शामिल तफ्तीश किया है।