सोनीपत। 13 जून 1999 को कारगिल के द्रास सेक्टर में पाकिस्तानी सैनिकों ने हमला किया। गोहाना के गांव रुखी निवासी सिपाही बलिदानी सुखबीर सिंह के सीने में गोली लगी थी, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने दुश्मनों का मुकाबला किया और उनको सीमापार खदेड़ने के बाद ही वे शहीद हुए।
शहीद की पत्नी चंदा देवी गोहाना के हुडा सेक्टर-सात में रहती हैं। उनके दो बेटे हैं। बड़ा आशीष और छोटा बेटा गौरव है। चंदा देवी पति को याद करते हुए भावुक हो जाती हैं। चंदा देवी बोलीं, पति जब शहीद हुए तब मैं दूसरे बेटे को जन्म देने वाली थी। पति का पत्र आया था कि दूसरे बच्चे के जन्म से पहले वे छुट्टी लेकर आ जाएंगे, लेकिन वे वादा पूरा नहीं कर पाए। उनकी शहादत की सूचना आई। उन्हें गर्व है कि वे शहीद की पत्नी हैं। शहीद सुखबीर सिंह सम्मान में गांव रुखी में स्मारक बनाने के साथ राजकीय स्कूल का नामकरण भी उन्हीं के नाम से किया गया है। छोटे बेटे गौरव ने पिता को नहीं देखा, लेकिन पिता की शहादत की शौर्यगाथा प्रेरणा देती है। गौरव सेना का अधिकारी बनना चाहता है। गांव के युवा शहीद पार्क से गुजरते हैं तो उनको शहीद सुखबीर सिंह की बहादुरी पर गर्व की अनुभूति होती है।
ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में भर्ती हुए थे
शहीद सुखवीर सिंह का जन्म 1 अप्रैल 1976 को हरियाणा के सोनीपत जिले की गोहाना तहसील के रुखी गांव में होशियार सिंह मलिक के यहां हुआ था। 27 दिसंबर, 1994 को वह भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में सिपाही के रूप में भर्ती हुए थे। प्रारंभिक प्रशिक्षण के बाद उन्हें 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन में ग्रेनेडियर के पद पर नियुक्त किया गया था। कारगिल युद्ध में सुखबीर सिंह 13 जून को देश की रक्षा करते हुए बलिदानी हुए थे। पूरे गांव को सुखबीर की शहादत पर गर्व है।
शहीद सुखबीर सिंह (फाइल फोटो )