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Sonipat News: मुनियों ने समझाया उत्तम आर्जव धर्म का मर्म

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फोटो 1श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मौजूद श्रद्धालु।स्रोत:प्रव - फोटो : Samvad
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नारनौल। नारनौल के श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दसलक्षण महामंडल विधान हुआ। आचार्य आरजव सागर के शिष्य मुनिश्री महंत सागर, विभोर सागर और सानंद सागर ने उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन दिए।
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मुनिश्री महत सागर ने कहा मन में हो सो वचन उचरिए, वचन होय सो तन सो करिए। उन्होंने मन, वाणी और क्रिया की सरलता को आर्जव धर्म का मूल बताया। मुनिश्री विभोर सागर ने मायाचारी को पाप बताया। उन्होंने कहा, संसार में आपकी चालाकी काम आ सकती है, लेकिन भगवान के दरबार में केवल आपकी सरलता ही काम आएगी। मुनिश्री सानंद सागर ने अपनी भूल स्वीकार करने को ही आर्जव धर्म बताया। प्रवक्ता सुरेंद्र जैन के अनुसार, जैन समाज दस दिन तक दसलक्षण पर्व मनाएगा। धर्म सभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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