रोहतक। हरियाणा में आई हालिया बाढ़ ने कुम्हार समुदाय के पारंपरिक मिट्टी के बर्तन उद्योग पर गहरा असर डाला है। बाढ़ के कारण मिट्टी की आपूर्ति पूरी तरह से बाधित हो गई है। इससे बर्तन बनाने का काम लगभग ठप हो गया है।
खेड़ी निवासी स्वरूप सिंह ने बताया कि मिट्टी उपलब्ध नहीं होने की वजह से पुराने स्टॉक पर निर्भर रहना पड़ रहा है। पहले करवा 30 रुपये में बिकता था मगर वह अब 50 रुपये में बिक रहा है। इसी तरह घड़े की कीमत 120 से बढ़कर 170 से 200 रुपये तक पहुंच गई है। यह हमारा पुश्तैनी काम है। इस बार बाढ़ के कारण मिट्टी न मिलने से व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस बार मिट्टी के बर्तन व दीये बनाने का कार्य एक महीने देरी से किया जा रहा है।
दिल्ली से मंगवानी पड़ रही है मिट्टी
पहले मिट्टी समर गोपालपुर, गढ़ी, बोहर, खेड़ी से आती थी। अधिक बारिश व बाढ़ के कारण मिट्टी की आपूर्ति बंद हो गई है। हमें दिल्ली के उत्तम नगर से मिट्टी मंगवानी पड़ रही है। इसकी कीमत ज्यादा है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। -सतपाल, दुकानदार, गांधी कैंप बाजार। संवाद