सोनीपत। एक दौर था जब अपनों तक संदेश पहुंचाने के लिए हस्त लिखित पत्र ही प्रमुख माध्यम थे। इनको पहुंचाने की जिम्मेदारी डाकिया की होती है। डाकिया जैसे ही मोहल्ले या गांवों में पहुंचते तो लोग यह पूछने से नहीं चूकते कि साहब मेरी चिट्ठी तो नहीं आई है।
आज भी काफी लोग हैं जो डाक के माध्यम से आए पत्रों को संजोकर रखे हैं। डिजिटल युग में निजी पत्रों को लिखने का सलीका खत्म हो गया है, इसके वाबजूद डाक विभाग के पास काम की जिम्मेदारी कम होने के बजाए बढ़ी है।
जिला सोनीपत में डाकघर बैंयापुर, बड़वासनी, एटलस साइकिल, भीमनगर, हरसाना कलां, फाजिलपुर, दिल्ली रोड, गंज बाजार, लहराड़ा, डाकघर औद्योगिक क्षेत्र, ककरोई, राम बाजार, महलाना, डाकघर मॉडल टाउन सोनीपत, सांदल कलां, मोहाना, राठधना एवं डाकघर रतनगढ़ आदि संचालित हो रहे हैं। जिले में 22 पोस्टमैनों की नियुक्ति है।
ई-कॉमर्स ने पार्सल डिलीवरी में भारी इजाफा किया है, जिससे डाक सेवाओं को नई मांगों के अनुकूल अपने आपको ढालने लिए मजबूर होना पड़ा है। हस्त लिखित पत्र भावनाओं से जुड़े होते हैं। यही वजह है कि पत्र लेकर आने वाले पोस्टमैन को लोग भावनात्मक सम्मान देते थे।
पुराने पोस्टमैन आज भी अपने संस्मरण में बताते हैं कि किस तरह जब वह डाक लेकर गांव में पहुंचते तो लोग सोचते थे वह उनके दरवाजे पर ही बैठकर बस्ता खोलें जिससे कि उनका पत्र सबसे पहले उन्हें पढ़ने को मिल जाए। लेकिन पहले फोन और अब स्मार्ट फोन ने लोगों के पत्र लिखने के शौक हो खत्म कर दिया है।
आखिरी बार कब लोगों ने पत्र लिखकर पोस्ट किया होगा यह शायद किसी को याद भी नहीं होगा। इसके बाद भी डाक विभाग में पोस्टमैनों के पास काम का बोझ कम होने के बजाए बढ़ा है। बस्ते से केवल लोगों के निजी पत्रों की संख्या नगण्य हो गई हैं। सोनीपत में सरकारी पत्राचारों की बुकिंग एवं वितरण का एक दिन का औसत 10 हजार से ऊपर है।
अब स्पीड पोस्ट से आए पत्रों, एटीएम, पैन कार्ड एवं अन्य जरूरी प्रपत्रों को सही लोकेशन पर पहुंचाने के सात पोस्टमैन को मोबाइल एप में अपनी लोकेशन अपडेट करानी पड़ती है। हेड पोस्ट ऑफिसर अशोक राठी ने बताया कि कॉमर्शियल पोस्ट की संख्या में इजाफा होने से समयबद्ध तरीके से डाक तो संबंधित लोकेशन तक पहुंचाने का काम तो डाकिया कर ही रहे हैं। तकनीकी तौर पर भी खुद को अपडेट किया है।