फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sonipat News: शाम होते अंधेरे में डूब जाता है केजीपी-केएमपी जीरो प्वाइंट, हादसे का डर

Sun, 21 Dec 2025 01:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
विज्ञापन
फोटो :16 : सोनीपत में केजीपी के जीरो प्वाइंट से कोहरे के बीच गुजरता कैंटर। संवाद
विज्ञापन
सोनीपत। नेशनल हाईवे-44 पर स्थित कुंडली मानेसर पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस-वे व कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (केजीपी) पेरिफेरल-वे के जीरो प्वाइंट पर रात्रि प्रकाश की समुचित व्यवस्था नहीं होने से वाहन चालकों को परेशानी होती है। सूर्य ढलते ही इस महत्वपूर्ण जंक्शन पर अंधेरा छा जाता है। इससे हाईवे पर चढ़ने और उतरने वाले मार्गों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। खासकर रात और कोहरे के दौरान यहां से गुजरना जोखिम भरा रहता है।
विज्ञापन


केएमपी एक्सप्रेस-वे पर लगी स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से शोपीस बनी हुई हैं। वहीं, केजीपी और नेशनल हाईवे-44 पर भी इस जीरो प्वाइंट के आसपास रात्रि प्रकाश की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। अंधेरे होने की वजह से कई वाहन चालक जीरो प्वाइंट पहचान नहीं पाते और आगे निकल जाते हैं। उनको घूम कर वापस आना पड़ता है।
इससे हादसा होने की संभावना बढ़ जाती है। यहां से रोजाना एक लाख से अधिक वाहन गुजरते हैं। ऐसे में छोटी सी चूक बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

केएमपी एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने किया था। इसका निर्माण कई बार रुकने के बाद 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केजीपी के साथ दोबारा शुरू कराया था। पलवल से मानेसर तक यह मार्ग 2016 में चालू हुआ जबकि मानेसर से कुंडली तक का हिस्सा 19 नवंबर 2018 को शुरू किया गया। कुंडली से पलवल तक दिल्ली को बाईपास करता यह एक्सप्रेस-वे प्रदेश की यातायात व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
विज्ञापन

इस पूरे प्रोजेक्ट और नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण पर करीब तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। बावजूद इसके तीनों हाईवे के संगम स्थल पर आज भी बुनियादी सुविधा रात्रि प्रकाश का अभाव है। एक्सप्रेस-वे पर 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ते वाहन अंधेरे की वजह से कभी भी दुर्घटनाग्रस्त हो सकते हैं।
कोहरे में और बढ़ेगा खतरा

सर्दी के मौसम में रात के समय घना कोहरा आम बात है। ऐसे में बिना स्ट्रीट लाइट के केवल वाहनों की हेडलाइट के सहारे सफर करना बेहद खतरनाक हो सकता है। कोहरे और अंधेरे का यह मेल किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। स्थानीय लोगों और नियमित यात्रियों का कहना है कि यदि जल्द रात्रि प्रकाश की व्यवस्था नहीं की गई तो यहां दुर्घटना हो सकती है।
टोल वसूली, सुविधा नदारद

वाहन चालकों को केएमपी-केजीपी और नेशनल हाईवे पर किलोमीटर के हिसाब से भारी-भरकम टोल टैक्स चुकाना पड़ता है। इसके बावजूद जीरो प्वाइंट पर आधुनिक और बुनियादी सुविधाओं का अभाव सवाल खड़े करता है। यात्रियों का कहना है कि जब टोल लिया जा रहा है तो सुरक्षा और रोशनी जैसी मूलभूत व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

केएमपी के जीरो प्वाइंट पर स्ट्रीट लाइट लगाई गई है। खराबी के कारण अगर वह बंद है तो उन्हें दुरुस्त कराया जाएगा। वाहन चालकों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। नेशनल हाईवे पर स्ट्रीट लाइट लगाने का काम एनएचएआई का है। -सुरेंद्र सिंह, अधीक्षण अभियंता, एचएसआईआईडीसी।
मैं रोजाना केएमपी-केजीपी जीरो प्वाइंट से गुजरता हूं। रात होते ही यहां पर अंधेरा छा जाता है। कोहरा छाने की स्थिति में तो रास्ता समझ में ही नहीं आता है। प्रशासन को तुरंत स्ट्रीट लाइट चालू करानी चाहिए वरना बड़ा हादसा हो सकता है। -विष्णु, बारोटा

-कोहरे में इस जीरो प्वाइंट का पता ही नहीं चलता। तेज रफ्तार में चलते वाहनों के बीच अंधेरा सबसे बड़ा खतरा है। टोल लिया जा रहा है तो रोशनी और सुरक्षा की व्यवस्था भी पूरी होनी चाहिए। -पवन, भैरा-बांकीपुर

-हजारों करोड़ खर्च होने के बाद भी यहां बुनियादी सुविधा नहीं है। स्ट्रीट लाइट, रिफ्लेक्टर और बेहतर संकेतक बोर्ड तुरंत लगाए जाएं। यह केवल सुविधा नहीं यात्रियों की जान का सवाल है। -मुकेश, कुंडली

फोटो :16 : सोनीपत में केजीपी के जीरो प्वाइंट से कोहरे के बीच गुजरता कैंटर। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें