सोनीपत। जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से गांवों में स्वच्छ पेयजल सप्लाई करने का दावा किया जा रहा है लेकिन हकीकत कोसों दूर है। हुल्लाहेड़ी गांव में पाइप लाइन लीक होने से पानी सड़क पर भर रहा है। वहीं, घरों में सप्लाई हो रहे दूषित पानी से लोगों को परेशानी हो रही है।
शिकायत करने के बावजूद विभाग की ओर से लाइन को दुरुस्त नहीं किया जा रहा है। दूसरी ओर मुरथल के ढाबों का दूषित पानी रजबहा और बड़ी औद्योगिक क्षेत्र का दूषित पानी शोधन के बाद ड्रेन नंबर छह में डाला जा रहा है। प्रशासन लोगों को साफ पानी मुहैया कराने में ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है।
गांव हुल्लाहेड़ी में रविवार पहुंचे जिला पार्षद संजय बड़वासनी ने बताया कि गांव में दूषित पानी सप्लाई होने से बीमारियां फैल रही है। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से 18 लोगों की मौत हो चुकी है मगर सरकार व प्रशासन इस तरफ तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं।
उनकी मांग है कि जिस गांव में भी पेयजल लाइन लीक है उसको ठीक किया जाए। समय पर सप्लाई ठीक न होने के कारण मजबूरन ग्रामीणों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है।
आज एसई को देंगे शिकायत
जिला पार्षद ने कहा कि सभी गांव में लीकेज ठीक करवाने की मांग को लेकर सोमवार को जनस्वास्थ्य विभाग कार्यालय में अधीक्षण अभियंता को लिखित शिकायत दी जाएगी। साथ ही मांग की जाएगी कि जितने भी तालाब पीने के पानी के लिए हैं उन सभी की सफाई समय पर होती रहे। अमृत योजना के तहत जिन तालाबों पर पैसा लगाया गया था उनकी कई तालाबों की हालत खराब है। अधिकारी उनकी समय पर सफाई करवाई जाए। गांव में समुचित पीने के पानी की व्यवस्था करवाई जिससे लोगों को साफ और स्वच्छ पानी पी सके।
नवंबर में सीईटीपी में मिली थीं खामियां
बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में संचालित कॉमन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) में कई खामियां सामने आई हैं। नवंबर 2025 में एनजीटी के निर्देश पर हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच की थी। जांच रिपोर्ट से पता लगा था कि दो सीईपीटी बिना वैध कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) के चालू थे जो एयर और वाटर एक्ट्स व पर्यावरण संरक्षण नियम 2016 का स्पष्ट उल्लंघन है। हालांकि, प्रबंधन ने सीटीओ के लिए आवेदन देना बताया था।
बीओडी मानक से अधिक
बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) जो पानी की शुद्धता तय करने का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना है निर्धारित सीमा 30 मिलीग्राम से अधिक पाई गई थी। एक सैंपल में बीओडी 40 मिलीग्राम और दूसरे में 31 मिलीग्राम मिली थी। जांच के दौरान स्टॉर्म वाटर सिस्टम और क्लोरीनेशन यूनिट बंद मिली थी।
मुरथल एसटीपी से पानी रजबहा में छोड़ा जा रहा
9.5 करोड़ रुपये की लागत से तीन एमएलडी क्षमता का एसटीपी लगाया गया था। वहां से मुरथल के ढाबों से निकलने वाले दूषित पानी का शोधन करके रजबहा में छोड़ा जा रहा है। सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण (एसएमडीए) ने पहले इस एसटीपी की क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई थी लेकिन वह अतिरिक्त जमीन उपलब्ध न होने के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसी वजह से एसएमडीए ने एसटीपी देवडू में लगाने का निर्णय लिया है। नए प्लांट के निर्माण से मुरथल, देवडू समेत एनएच-44 के किनारे बसे क्षेत्रों को बेहतर सीवरेज प्रबंधन की सुविधा मिलेगी।
फोटो 13: सोनीपत के गांव हुल्लाहेड़ी में पेयजल लाइन लीक होने से सड़क पर भर रहे पानी को दिखाते जि