खानपुर कलां गांव में पहले भी कुशाण कालीन सिक्के मिल चुके हैं। प्रतिमा के साथ ही महाभारत काल की धूसर परंपरा से मिलते-जुलते बर्तनों के अवशेष भी मिले हैं।
महिला की टेराकोटा की प्रतिमा, जिसके शुंग कालीन होने की संभावना जताई जा रही। महाभारत कालीन धूसर परंपरा से मिलत-जुलते बर्तनों के अवशेष।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरियाणा के सोनीपत जिले के गोहाना क्षेत्र में महिला मेडिकल कॉलेज व महिला विश्वविद्यालय के लिए विख्यात गांव खानपुर कलां में ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक अवशेष मिले हैं। पहले भी इस गांव के ग्रामीणों को कुशाण कालीन सिक्के मिलते रहे हैं। अब महिला की टेराकोटा की प्रतिमा मिली है। संभावना है कि यह शुंग काल की है। साथ ही महाभारत काल की धूसर परंपरा से मिलते-जुलते बर्तनों के अवशेष भी मिले हैं।
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बुटाना गांव के चौ. धज्जाराम महाविद्यालय के इतिहास विभाग के सहायक प्रोफेसर संदीप रोहिल्ला और मतलौडा के महाविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. विनय दांगी का कहना है कि गांव खानपुर कलां का टीला हड़प्पा संस्कृति से लेकर अब तक की विभिन्न ज्ञात-अज्ञात संस्कृतियों को समेटे हुए हैं। दोनों इतिहास विशेषज्ञों ने दावा किया है कि अगर गांव खानपुर कलां के स्थल विशेष की गहन खोदाई करवाई जाए तो विभिन्न पुरातन संस्कृतियों के अवशेष मिल सकते हैं।
डॉ. संदीप रोहिल्ला का दावा है कि अब टेराकोट की महिला की जो शृंगार प्रतिमा मिली है, वह शुंग काल की हो सकती है। उनके अनुसार, इसी तरह बर्तनों के अवशेष मिले हैं। बर्तन धूसर परंपरा से मिलते-जुलते हैं, जिनका सीधा सरोकार महाभारत काल से है।
टीले पर ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक अवशेष तलाशते सहायक प्रोफेसर संदीप रोहिल्ला।
उनका कहना है कि इससे पहले भी गांव खानपुर कलां के ग्रामीणों को कुशाण काल के सिक्के अनेक बार मिल चुके हैं। उनके अनुसार गांव का टीला पूर्ण ऐतिहासिक और पुरातात्विक महता का है। इस टीले की खोदाई से अनेक संस्कृतियों के अवशेष मिल सकते हैं।