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Sonipat News: राष्ट्रीय मध्यस्थता प्रतियोगिता में टीसी-06 विजेता, टीसी-14 उपविजेता

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डॉ. बीआर अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में हुई राष्ट्रीय मध्यस्थता प्रतियोगिता में शामिल
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सोनीपत। डॉ. बीआर अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के संघर्ष प्रबंधन एवं विवाद समाधान केंद्र की ओर से आयोजित राष्ट्रीय मध्यस्थता प्रतियोगिता मेडियस 1.0 : द मेडिएशन चैलेंज का वीरवार को समापन हुआ। अंतिम मुकाबले में टीसी-06 ने टीसी-14 को पछाड़कर प्रतियोगिता जीती। देश के विभिन्न विधि संस्थानों के प्रतिभागियों ने मध्यस्थता, वार्ता, संवाद और विवाद समाधान में अपनी व्यावहारिक दक्षता का प्रदर्शन किया।
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प्रतियोगिता के प्रारंभिक चरण में 28 वार्ता टीमों और 14 स्वतंत्र मध्यस्थों ने भाग लिया। प्रतिभागियों की रणनीतिक सोच, संवाद कौशल, समय प्रबंधन, वार्ता क्षमता और प्रभावी समाधान खोजने की योग्यता का परीक्षण वास्तविक जीवन से जुड़े विवादों के माध्यम से किया गया। आगे के चरणों में बाल अभिरक्षा से संबंधित पारिवारिक विवाद और दो राज्यों के बीच जल संसाधनों से जुड़े जटिल मामलों पर मध्यस्थता कराई गई।
अंतिम चरण में टीसी-06 और टीसी-14 के बीच मुकाबला हुआ। विधिवत लॉ फर्म के संस्थापक एवं मध्यस्थ राहुल शर्मा ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। 60 मिनट चले अंतिम मुकाबले के बाद टीसी-06 को विजेता और टीसी-14 को उपविजेता घोषित किया गया। सर्वश्रेष्ठ टीम, सर्वश्रेष्ठ मध्यस्थ और सर्वश्रेष्ठ मध्यस्थता योजना सहित विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए।
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समापन समारोह में मुख्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित किया। पूर्व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिल्ली पवन कुमार जैन ने वैकल्पिक विवाद समाधान के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मध्यस्थता को विवादों के सरल, प्रभावी और समयबद्ध समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। पूर्व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिल्ली विनय कुमार खन्ना ने भी मध्यस्थता के व्यापक उपयोग और बढ़ती प्रासंगिकता पर विचार रखे।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. देविंदर सिंह ने कहा कि मध्यस्थता न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग बनती जा रही है। विधि विद्यार्थियों के लिए कानून का सैद्धांतिक ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें संवाद, वार्ता, सहमति निर्माण और विवादों के व्यावहारिक समाधान की दक्षताओं से भी समृद्ध होना जरूरी है। ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों में इन कौशलों को समझने और लागू करने का अवसर देती हैं।
कुलसचिव एवं डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. आशुतोष मिश्रा ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ती हैं। इससे विद्यार्थियों में तार्किक सोच, प्रभावी संचार, धैर्य, संवेदनशीलता और समाधान-केंद्रित दृष्टिकोण विकसित होता है। डॉ. श्रुति दहिया ने आभार व्यक्त किया।
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