पब्लिक हेल्थ रेनीवाल प्रोजेक्ट के तहत 95 करोड़ रुपये खर्च कर यमुना के पानी से शहरवासियों की प्यास बुझाएगा। यह पानी स्वास्थ्य के लिए सही है या नहीं, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक सैंपल लेकर जांच नहीं की गई है। केवल जन स्वास्थ्य विभाग ने अपनी लैब में जांच की बात कही है। ऐसे में यमुना का पानी लोगों की सेहत पर कैसा असर करेगा, अधिकारी यह बताने में असमर्थ हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शहरवासियों की प्यास बुझाने के लिए 30 दिसंबर 2011 में रेनीवेल प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था। 2012 में प्रोजेक्ट के लिए 95 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था। प्रोजेक्ट अब पूरा हुआ है, जिसका ट्रायल चल रहा है। लेकिन एक फाल्ट अभी सामने आया है। पता चला है कि जिस पानी से शहरवासियों की प्यास बुझाने की तैयारी है, उसके अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने सैंपल तक नहीं लिए हैं। अब यह पानी मानकों पर खरा उतर रहा है या नहीं, इसकी जानकारी पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारी पुख्ता तौर पर नहीं दे पा रहे हैं।
दो लाख लोगों के लिए लाया गया है पानी
शहर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए लगभग दो लाख लोगों के लिए यमुना नदी से पानी लाया गया है। शहर में 11 मिलियन गैलेन पानी की जरूरत है, लेकिन महज आठ मिलियन गैलेन पानी ही पहुंच रहा है। इससे शहर में पानी की कमी पड़ रही है। कमी को पूरा करने के लिए यमुना नदी से पानी लाया गया है।
पहले लीक अब छोड़ दिए सड़क में गड्डे
रेनीवाल प्रोजेक्ट ट्रायल में ही लीक होने के कारण सोनीपत-बहालगढ़ रोड को जगह-जगह से उखाड़ कर पानी की लीकेज को ठीक करवाया गया है। लेकिन लीकेज ठीक होने के बाद किए गए गड्ढों में महज मिट्टी डालकर छोड़ दिया गया है। इससे हादसों का खतरा बढ़ गया है।
रेनीवेल प्रोजेक्ट पर भी नहीं पुख्ता इंतजाम
रेनीवेल प्रोजेक्ट को यमुना नदी के पास मच्छरौला और जाजल गांव के पास बनाया गया है, लेकिन इन दोनों स्थानों पर सुरक्षा के कोई भी इंतजाम नहीं किए गए हैं। यहां भी किसी समय हादसा हो सकता है।
नजदीकी गांवों का भूजल स्तर जा सकता है नीचे
डार्क जोन में शामिल यमुना के आसपास के एरिया में यमुना नदी के ऊपर रेनीवेल प्रोजेक्ट लगाया गया है। यहां पहले से ही 50 फीट नीचे भूजल है और ऐसे में बड़ा प्रोजेक्ट लगने से गांवों में पानी का संकट हो सकता है। क्योंकि मछौला व जाजल में चार कुएं बनकर समर्सिबल पंप लगाए गए हैं।
शिलान्यास पत्थर को आज भी प्रोजेक्ट तक पहुंचने का इंतजार
पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान शुरू हुए इस रेनीवाल प्रोजेक्ट के शिलान्यास का पत्थर आज भी पब्लिक हेल्थ विभाग के परिसर में झाड़ियों के बीच गुम होने की कगार पर है। पांच साल बाद भी शिलान्यास पत्थर के यहीं पर होने के सवाल पर विभाग के अधिकारी कुछ कहने को तैयार नहीं हैं।
पब्लिक हेल्थ के कार्यकारी अभियंता राजीव गुप्ता से सीधी बातचीत
सवाल- यमुना नदी से आने वाले पानी के सैंपल भरकर जांच की गई है या नहीं?
जवाब- विभाग की लैब में जांच हुई थी। आगे भी करवा देंगे।
सवाल- कितने दिन पहले करवाई गई है?
जवाब- (थोड़ी देर सोच कर) बस करवा दी है।
सवाल- स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इनकार कर रहे हैं।
जवाब- उनसे नहीं करवाई गई है। अपनी लैब में जांच करवाई है।
सवाल- यमुना नदी से आने वाले पानी की लीकेज को ठीक करवाया गया है क्या?
जवाब- ट्रायल के दौरान लीकेज हो गई थी जिसे ठीक करवा दिया गया है।
सवाल- लीकेज के बाद गड्ढे पर मिट्टी डालकर छोड़ दिया गया है, सड़क कब तक बनेगी?
जवाब- बीएंडआर के अधिकारियों से बात हो गई है। जल्द ही सड़क ठीक करवा दी जाएगी।
सवाल- पूर्व सीएम द्वारा किए गए शिलान्यास का पत्थर अभी तक कार्यालय परिसर में है।
जवाब- सरकार के आदेश पर लगाया जाता है शिलान्यास पत्थर।
दूसरों का नाम हटाने और अपने नाम के पत्थर लगवाने वाली सरकार है बीजेपी : दीपेंद्र हुड्डा
बीजेपी सरकार कांग्रेस राज में करवाए गए कामों को जनता से छिपाने के लिए ऐसा काम कर रहे हैं, क्योंकि शिलान्यास को पत्थर अपने स्थान पर लगाया जाना था, लेकिन बीजेपी सरकार राजनीति कर रही है। पूरी परियोजनाओं पर सरकार पत्थर लगाकर नाम करना चाहती है। इससे भाजपा की छोटी मानसिकता सामने आई है।
दीपेंद्र हुड्डा, सांसद रोहतक
भाजपा नहीं, कांग्रेस करती है राजनीति
भाजपा नेता राजीव जैन का कहना है कि छोटी राजनीति भाजपा नहीं कांग्रेस करती रही है। जहां पर रेनीवाल प्रोजेक्ट पर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के शिलान्यास पत्थर को लगाने का सवाल है। समय आने पर प्रोजेक्ट पर पूर्व सीएम के पत्थर को भी लगा दिया जाएगा।
राजीव जैन, भाजपा मीडिया प्रदेश प्रमुख