सोनीपत। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल सोनीपत में प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। रात से ही कोहरा व स्मॉग छाया हुआ है। स्मॉग छाने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। कोहरा और उसमें शामिल धूल, धुएं के कणों के कारण गैस चैंबर के हालात बने हैं और सांस लेने में परेशानी होने लगी है। साथ ही गले में खराश महसूस होने लगी है। स्मॉग के कारण हवा दमघोंटू बनी रही। लोग दिनभर सूर्य की चमक को तरसते रहे।
सर्दी बढ़ने के साथ ही वायु प्रदूषण का स्तर भी बढऩे लगा है। स्मॉग छाने से गैस चैंबर जैसे हालात बन गए हैं। जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगातार बढ़ रहा है। यह गंभीर स्तर पर जा चुका है। सोमवार एक्यूआई 430 दर्ज किया गया। रात को आठ बजे यह 456 तक पहुंच गया। सर्दी बढ़ने के साथ ही प्रदूषण के स्तर में और इजाफा होने का आशंका है। वहीं पीएम-10 का स्तर 500 व पीएम 2.5 का स्तर 488 तक पहुंच गया है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। इसमें लोगों को परेशानी होने लगती है।
सांस के रोगियों व बुजुर्गों को घर रहने की सलाह
बढ़ता प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। इसमें बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। स्मॉग के साथ अनेक प्रकार के प्रदूषित तत्व मिले होते हैं। यह शरीर में जाकर सांस से संबंधित रोग के कारण बनते हैं। चिकित्सक एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. जसवंत सिंह पूनिया ने बुजुर्गों व सांस के रोगियों को स्मॉग में बाहर न निकलने की हिदायत दी है। वह सुबह-शाम घूमने वालों को सावधानी बरतने की कह रहे हैं। साथ ही लोगों को बेहतर क्वालिटी का मास्क लगाने के लिए हिदायत दे रहे हैं।
प्रदूषण से बढ़े सांस के मरीज
प्रदूषण का स्तर ज्यादा बढ़ने के कारण जिला अस्पताल में सांस के मरीज बढ़े हैं। सांस के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से सबसे अधिक बुजुर्ग इसका शिकार हो रहे हैं। बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्थमा में सांस नली या इससे जुड़े हिस्सों में सूजन आ जाती है। इसके चलते फेफड़ों में हवा जाने में रुकावट पैदा होती है।
ग्रैप-4 के नियम हुए लागू, ठोस कार्रवाई का अभाव
ग्रैप-4 के नियम लागू होने के बाद ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। अभी भी कई स्थानों पर कूड़े में आग लगा दी जाती है। खुले में निर्माण सामग्री को डाला जा रहा है।
प्रदूषण फैलाने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। जहां पर भी प्रदूषण फैलाने वाले कारक दिखाई देते हैं तो उन्हें लेकर कार्रवाई की जाती है।
- प्रदीप सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड