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ग्राउंड रिपोर्टः कुंडली बॉर्डर पर अचानक दोगुने से ज्यादा हो गए किसान, इलाके के लोग परेशान

Mon, 14 Dec 2020 02:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा अंकित चौहान, सोनीपत

सार

  • किसानों का उमड़ा हुजूम तो अपने ही घरों से नहीं निकल सकते कुंडली समेत कई गांवों के लोग
  • किसान आंदोलन से रास्ते बंद होने से खेतों से जाकर अन्य गांवों व नरेला से लोगों को लाना पड़ रहा राशन
  • कुंडली के आसपास के गांव रसोई, नाथूपुर, प्याऊ मनियारी, सफियाबाद, नांगल के 50 हजार लोगों की बढ़ी परेशानी
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आंदोलनरत किसान... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कुंडली बॉर्डर पर दो दिन में जिस तरह से किसानों का हुजूम उमड़ा है उसने कुंडली समेत आसपास के कई गांवों के लोगों की परेशानी को बढ़ा दिया है। वहां के लोगों के लिए यह हालात हो गए हैं कि अब वह अपने ही घरों से नहीं निकल सकते हैं। अभी तक घरों से निकलने के लिए सड़कों पर कुछ जगह बची थी, लेकिन दो दिन से सड़कों पर इतनी भी जगह नहीं बची कि वहां से कोई बाइक लेकर भी नहीं निकल सकता है। वहीं पैदल निकलने के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ती है। इस तरह के हालात होने पर कुंडली व आसपास के गांवों के लोगों को राशन भी खेतों के रास्ते से जाकर लाना पड़ रहा है। 

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कृषि कानूनों को रद कराने की मांग को लेकर किसानों ने 16 दिन से नेशनल हाईवे 44 के कुंडली बॉर्डर पर डेरा डाला हुआ है। वहां लगातार किसान बढ़ते जा रहे हैं और जहां सबसे पहले पंजाब के करीब 25 हजार किसानों ने पहुंचकर धरना शुरू किया था। वहीं उसके बाद हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान व अन्य राज्यों के किसान भी पहुंच रहे हैं। इनके अलावा दो दिन में जिस तरह पंजाब से किसानों के जत्थे पहुंचे हैं, उससे वहां किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा है। वहां 50 हजार से ज्यादा किसान हो गए हैं। 

किसानों का पड़ाव 7 किमी तक है, लेकिन वहां दो दिन पहले तक किसानों के बीच से सड़क पर बाइक व छोटे वाहन निकलने की जगह थी। जिससे कुंडली व आसपास के गांवों रसोई, नाथूपुर, प्याऊ मनियारी, सफियाबाद, नांगल के लोग उस जगह का इस्तेमाल करके घर का जरूरी सामान लेकर आ जाते थे। इसके अलावा किसी जरूरी काम से जाना होता था तो वहां से जा सकते थे। दो दिन से सड़क पर वह जगह भी नहीं बची है और अब हालात ऐसे हो गए है कि इन गांवों के लोग अपने घरों से बाहर सड़क पर नहीं आ सकते है। उनको राशन व अन्य जरूरी सामान लेकर आने के लिए भी खेतों के रास्ते से नरेला या आसपास के गांव में जाना पड़ रहा है। 
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कुंडली में पहले ही दुकान, क्लीनिक, मॉल सब कुछ बंद
कुंडली के लोग अगर पैदल जाकर घर का सामान लेकर आए तो ऐसा भी नहीं कर सकते है। क्योंकि वहां के बाजार में किसान आंदोलन के बपहले ही दिन से दुकान, क्लीनिक, मॉल, शोरूम सबकुछ बंद है। जहां पहले कुछ दिन किसान आंदोलन के डर से उनको बंद रखा गया, वहीं उसके बाद प्रशासन ने नुकसान की आशंका को देखते हुए प्रतिष्ठान बंद कराने के आदेश जारी कर दिए। इस तरह करीब 50 हजार से ज्यादा लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। 

लोगों ने कहा...
जिस समय से किसान आंदोलन शुरू हुआ है, उसी समय से क्लीनिक बंद किया हुआ है। क्योंकि हमारा क्लीनिक कुंडली में जीटी रोड के पास है। वहां रास्ता बंद है तो मरीजों वहां नहीं आ सकते है। इसलिए ही क्लीनिक पहले ही दिन से बंद है। अब किसान आंदोलन खत्म होने के बाद ही रास्ता खुलने पर क्लीनिक खोला जाएगा। 
- डॉ. राहुल सिंह

किसान आंदोलन के कारण स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं। क्योंकि सड़क पूरी तरह से जाम है तो संपर्क मार्ग भी बंद है। इसलिए काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सड़क जाम होने के कारण घर के जरूरी सामान तक नहीं ला सकते है। यह समस्या कब तक झेलनी पड़ेगी, अभी यह पता ही नहीं चल रहा। 
-निरंजन, शिक्षक

कुंडली में सबसे ज्यादा लोगों को परेशानी हो रही है। क्योंकि सड़क पूरी तरह से जाम हो चुकी है और अब पैदल तक निकलने में परेशानी हो रही है। इसलिए लोग अपने घरों से बाहर ही नहीं निकल रहे है। वहां की दुकान, मॉल, क्लीनिक सबकुछ बंद है तो अन्य गांवों से कुछ सामान लेकर लोग आते है। 
- मनीष, पूर्व सरपंच कुंडली

हमारे यहां से लोग पहले कुंडली से सामान लेकर आते थे, लेकिन कुंडली में सबकुछ बंद होने के बाद दिल्ली के नरेला से सामान लाने लगे। इसके अलावा किसी के बीमार होने पर उसे नरेला ही डॉक्टर के पास लेकर जाने लगे। किसानों ने वह रास्ता भी बंद कर दिया और वहां बैरियर लगा दिया था। जिससे गांव के लोग बंद होकर रह गए हैं और इससे परेशानी झेलनी पड़ रही है। 
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- अमित, सरपंच सफियाबाद

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