फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रोडवेज का चक्का जाम, बैंकों में नहीं हुआ काम

Sat, 03 Sep 2016 12:34 AM IST
Sonipat
विज्ञापन
strike - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों आह्वान पर शुक्रवार को की गई राष्ट्रव्यापी हड़ताल का जिले में व्यापक असर रहा। रोडवेज व बैंक सेवाएं जहां बुरी तरह प्रभावित रही, वहीं बिजली, पानी, सफाई व सीवरेज सेवाओं के कर्मचारी हड़ताल पर रहे, लेकिन कच्चे कर्मचारियों के दम पर हालात को अधिकारियों ने संभाले रखा। एक अनुमान के मुताबिक, हड़ताल से एक दिन में रोडवेज को जहां 12 लाख रुपये का नुकसान हुआ है, जबकि बैंकों में 300 करोड़ का लेनदेन प्रभावित रहा।
विज्ञापन


हालांकि, एसबीआई और निजी बैंकों में पहले की तरह काम हुआ। प्रशासन की ओर से हड़ताल रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया, इसके चलते कहीं भी हड़ताली कर्मचारियों व प्रशासन के बीच कहीं टकराई की स्थिति नजर नहीं आई। सर्व कर्मचारी संघ, कर्मचारी महासंघ, इंटक, एटक, एआईयूटीयूसी, हरियाणा बैंक एम्पलाई फेडरेशन, सीटू, मुरथल विवि, खानपुर विवि के कर्मचारी के अलावा औद्योगिक क्षेत्र के कर्मचारी शामिल हुए। अनुमान के मुताबिक यूनियनों से जुड़े करीब दस हजार कर्मचारी हड़ताल पर रहे। भारतीय मजदूर संघ के कर्मियों ने हड़ताल में हिस्सा नहीं लिया। सोनीपत जिला मुख्यालय के अलावा, गोहाना, गन्नौर, खरखौदा व राई में भी हड़ताल का असर देखने को मिला। हालांकि, आम पब्लिक सतर्क दिखी। एक दिन के लिए लोगों ने अपनी यात्रा व बैंकों के कार्यों को टाल दिया।


रोडवेज : बस अड्डे पर रहा चक्का जाम, मात्र 10 बसें निकलीं
सोनीपत डिपो में दिनभर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर दिखा। डिपो में सुबह चार बजे से छह बजे तक लंबी दूरी की 10 बसों को निकाला जा चुका था। रोडवेज की 236 बसों में से 161 बस चल सकी। सोनीपत डिपो की 98 बसें सड़कों पर सरपट दौड़ी। इनमें से नाइट स्टे पर 70 बसें गांवों में खड़ी थी। कर्मचारियों के विरोध के बाद बसों को नहीं चलने दिया। इसके बाद पूरा दिन चक्का जाम रहा। लंबे रूट की चार बसों को गुरुवार रात को ही डिपो महाप्रबंधक ने पुलिस लाइन में खड़ा करवा दिया था, जहां से वे सुबह रवाना हुई।
विज्ञापन


12 लाख का रोडवेज का हुआ घाटा
रोडवेज विभाग को रोजाना 14 लाख की आय प्राप्त होती है। शुक्रवार को हड़ताल के दौरान महज 161 बसों के चलने से करीब 12 लाख रुपये का घाटा हुआ। वहीं, बसों का चक्का जाम रहने से लोग बस अड्डों पर भटकते नजर आए। इसके बाद निजी वाहनों में धक्के खाने को मजबूर होना पड़ा।

निजी बसें भी करती रहीं यात्रियों का इंतजार
जिले में 85 प्राइवेट बसें चल रही हैं। रोडवेज बसों का पहिया थमने के बाद यात्री प्राइवेट बसों के भरोसे रहे। निजी बस चालकों ने बस स्टैंड के बाहर से सवारियां भरी, लेकिन ज्यादा भीड़ नजर नहीं आई। एक बस परिचालक ने बताया कि पहले से लोगों को हड़ताल का पता था। इस कारण ज्यादा लोग घरों से बाहर नहीं आए।


ये बोले अधिकारी : जीएम जोगेंद्र सिंह का कहना है कि 161 बसों को सड़कों पर दौड़ाया गया। कई बसों को पहले ही नाइट स्टे पर भेज दिया गया है। जो कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए, उनकी गैर हाजिरी लगाकर रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी गई है। हालांकि, डिपो को 12 लाख के करीब आय का नुकसान हुआ है।  

स्वास्थ्य सेवाएं : काले बिल्ले लगाकर पहुंची स्टाफ नर्स
राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका असर देखने को नहीं मिला। अस्पताल के आपातकालीन विभाग मेें स्टाफ नर्सों ने काले बल्ले लगाकर काम किया और सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों का विरोध किया। जिले भर में तैनात 927 कर्मचारियों में से 30 कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए। वहीं, नागरिक अस्पताल में 180 के करीब कर्मचारी हैं। हालांकि, ओपीडी व आपातकालीन विभाग में कोई परेशानी नहीं हुई। हालांकि, जन्म-प्रमाण पत्र बनवाने आए लोगों को निराश लौटना पड़ा।


ये बोले अधिकारी : सिविल सर्जन ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं सुचारु रूप से जारी रही। जो लोग हड़ताल में शामिल हुए, उनकी गैर हाजिरी लगा दी गई है और रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी है।

बिजली : ठेके पर लगे कर्मचारियों के भरोसे मिली पॉवर
बिजली निगम में 1051 कर्मचारियों में से 868 कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए। हड़ताल पर जाने के बाद पूरे जिले की बिजली की सप्लाई का जिम्मा 252 कच्चे कर्मचारियों के कंधों पर रखा गया। इसके, बाद शहर में बिजली की किसी भी तरह की कोई परेशानी देखने को नहीं मिली। लेकिन, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर बाद ग्रामीण क्षेत्रों की सप्लाई को भी सुचारु रूप से चालू कर दिया गया। शहर में बिजली कार्यालयों पर ताले तक लटके रहे।
विज्ञापन


 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें