फोटो 04- सोनीपत के मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोज
सोनीपत। ओलंपियन योगेश्वर दत्त ने कहा कि बिना परिश्रम के कभी इतिहास नहीं लिखा जा सकता। खिलाड़ी देश की धरोहर होते हैं। कौन-सा देश कितना शक्तिशाली है, इस बात का पता, उसके देश के ओलंपिक में पदकों से पता चलता है।
वह मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) में चल रही तीन दिवसीय वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के दूसरे दिन बताैर मुख्य अतिथि पहुंचे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने की।
ओलंपिक की कुश्ती स्पर्धा में पदक विजेता एवं चार बार देश का प्रतिनिधित्व कर चुके पहलवान योगेश्वर दत्त ने खिलाड़ियाें को प्रेरित करते हुए कहा कि ओलंपिक में पदक जीतने की प्रेरणा उन्होंने वर्ष 1996 के पदक विजेता लॉन टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस से ली थी। उस समय ओलंपिक में एक ही पदक आया था।
खेल पदक नहीं, संघर्ष को जीतना सिखाते हैं : योगेश्वर दत्त ने कहा कि खेल में हर खिलाड़ी पदक नहीं जीतता। पदक तीन खिलाड़ी ही जीत पाते हैं। खेल हमें जीवन के संघर्ष में जीतना सिखाते हैं। मंजिल में अंत तक कैसे पहुंचा जाए, यह हमें खेल के माध्यम से पता चलता है। देश के लिए कुछ करने का जज्बा हमें अपने वीर सैनिकों से मिलता है।