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कैशलेस के दावे हुए हवाई, चार दिन में सिर्फ एक टिकट बनाई

Fri, 20 Jan 2017 11:15 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
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नकद में टिकट लेते यात्री। - फोटो : sonipat
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सोनीपत। बस अड्डे पर रोडवेज विभाग के कैशलेस के दावे चार दिन बाद ही हवाई नजर आने लगे हैं। यहां दिनभर में 25 हजार यात्री आते हैं, लेकिन उनके लिए विभाग ने सिर्फ एक ही पीओएस मशीन का इंतजाम कर रखा है। यह मशीन भी सिर्फ एक परिचालक के पास रहती है। जिसकी ड्यूटी सुबह 11 बजे से शाम सात बजे तक पानीपत से चंडीगढ़ बूथ पर होती है। बाकी अधिकतर परिचालकों को यह मशीन चलाना ही नहीं आता है। यही वजह है कि परिचालक नकद पैसे लेकर ही यात्रियों के टिकट काट रहे हैं। कैशलेस ट्रांजेक्शन से टिकट लेने के उत्साह की बात करें तो अब तक मात्र एक टिकट ही कार्ड स्वैप करके लिया गया है। 
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कैशलेस का स्टीकर लगा था, मशीन दिखी नहीं
रोडवेज को कैशलेस बनाने के लिए विभाग ने 262 पीओएस मशीनों की मांग शासन को भेजी है, लेकिन मात्र पांच मशीनें ही यहां आई हैं। अधिकारियों ने इनसे सोनीपत, गोहाना, मुरथल पेट्रोल पंप, गन्नौर और खरखौदा बस स्टैंड को कैशलेस करने का दावा किया था। हालांकि विभागीय दावे के अनुसार शुक्रवार दोपहर बाद दो बजे जब अमर उजाला की टीम ने बस अड्डे का जायजा लिया तो दिल्ली, चंडीगढ़ बूथ, पूछताछ केंद्र और बस स्टैंड परिसर समेत कई जगह टिकट कैशलेस से मिलने का पर्चा तो लगा मिला, लेकिन पीओएस मशीन किसी भी बूथ पर नहीं दिखी।
परिचालकों ने कहा, लोगों की नहीं है रुचि
बूथ पर कार्यरत परिचालकों से बात करने पर पता चला कि अधिकतर को पीओएस मशीनें चलानी ही नहीं आती। पानीपत बूथ पर बैठे एक परिचालक ने बताया कि उसके बैग में पीओएस मशीन है। उसने दावा किया कि पहले तो कोई कैशलेस से टिकट लेने आता नहीं है। अगर कोई आएगा तो वह उसी समय दे देते हैं। लोगों की इसके प्रति रुचि नहीं होने के चलते नकद भुगतान पर ही टिकट दिया जा रहा है।
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बस स्टैंड पर 12 बूथ, केवल छह को कैशलेस की ट्रेनिंग
सोनीपत बस स्टैंड डिपो में 318 चालक और 381 परिचालक हैं। यहां 12 बूथ बने हैं, जिन पर समयानुसार परिचालकों की ड्यूटी लगाई जाती है। कैशलेस सुविधा शुरू करने के लिए विभाग द्वारा छह बूथ कर्मचारियों को इसकी ट्रेनिंग दी गई है, जिनमें गोहाना, पानीपत-चंडीगढ़, दिल्ली-जयपुर, रोहतक-झज्जर, खानपुर कलां व बागपत-बड़ौत शामिल हैं, लेकिन विभाग द्वारा पीओएस मशीन एक कर्मचारी को ही दी गई है।
जमीनी हकीकत से होना होगा वाकिफ
प्रशासन लगातार कैशलेस को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन यह अभियान हवा में नजर आ रहा है। इससे पहले प्रशासन ने शहर की सब्जी मंडी कैशलेस होने का दावा किया था, लेकिन दो दिन बाद ही प्रशासन का यह दावा फेल साबित हुआ क्योंकि मंडी में बैठे मासाखोरों को कैशलेस का ज्ञान ही नहीं था। प्रशासन को कैशलेस के लिए जमीनी हकीकत तक जाना होगा इसके बाद ही अभियान में सफलता मिल सकती है।
नहीं दिखी मशीन
रोडवेज में कैशलेस होना अच्छी बात है। दिल्ली से सोनीपत किसी काम से आया हुआ था। यहां पीओएस मशीन से पैसे का भुगतान करने का पर्चा तो लगा हुआ है, लेकिन बूथ पर मशीन दिखाई नहीं दी। इसलिए वापस जाने के लिए दिल्ली का टिकट नकद खरीदा। अधिकारियों को चाहिए कि कैशलेस प्रणाली को सुचारु रूप ये लागू करें।
-सुनील, दिल्ली निवासी
परिचालक बोले मशीन खराब
काम के चलते सोनीपत आया था। दोपहर बाद वापस घर जाना था। बस स्टैंड में कैशलेस से टिकट लेने की सूचना मिली। गन्नौर जाने के लिए जब पानीपत बूथ पर कैशलेस से टिकट लेने को पूछा तो परिचालक ने कहा कि मशीन खराब है। इस कारण नकद ही टिकट लेनी पड़ी। अगर पीओएस मशीन से टिकट का भुगतान होता तो कर देता।
-कर्मवीर, गन्नौर निवासी
टिकटों की मांग बढ़ने पर और मशीन मंगवाई जाएंगी
कैशलेस के लिए पांच पीओएस मशीनें मिली हैं। इनमें से एक-एक सोनीपत, गोहाना, गन्नौर, खरखौदा और मुरथल पेट्रोल पंप पर भेजी गई हैं। शहर के बस स्टैंड पर सभी परिचालकों के लिए पीओएस मशीन अलॉट नहीं है। इसे एक परिचालक के लिए अलॉट किया गया है, जो सुबह 11 बजे से शाम सात बजे तक बूथ पर ड्यूटी देता है। अगर कोई यात्री पीओएस मशीन से टिकट कटवाता है तो काट दी जाती है। अभी कैशलेस से टिकटों की मांग नहीं है। अगर टिकटों की मांग बढ़ती है तो उसके आधार पर ओर मशीन मंगवा दी जाएंगी।
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-रामचंद्र, सोनीपत डिपो इंचार्ज।
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