रियो में हुए पैरालंपिक में पांच महीने पहले ही देश के लिए मेडल जीतने वाले खिलाड़ी दुबई व चीन में खेलने नहीं जाएंगे। किसी ने इन दोनों जगह मार्च व मई में होने वाली चैंपियनशिप के लिए रुचि नहीं दिखाई है। सोनीपत के साई सेंटर में हुए ट्रायल के दौरान भी पैरालंपिक में मेडल जीतने वाले चारों खिलाड़ियों में एक भी नहीं पहुंचा है, जबकि पैरालंपिक एथलेटिक्स कमेटी की ओर से सभी को दोनों चैंपियनशिप के लिए सूचना भेजी गई थी, लेकिन किसी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। इसको देखते हुए ट्रायल लेकर अन्य खिलाड़ियों को दुबई व चीन में भेजने के लिए चुना गया।
मार्च और मई में है प्रतियोगिता
रियो में हुए पैरालंपिक के बाद कोई अंतर्राष्ट्रीय चैंपियनशिप नहीं हुई है। अब मार्च में दुबई में फाजा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप होनी है तो मई में चाइना ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप होगी। इन दोनों चैंपियनशिप के लिए ही भारत की ओर से खेलने भेजने को सोनीपत के साई सेंटर में पैरा एथलीट का ट्रायल रखा गया था। इसके लिए पैरालंपिक में मेडल जीतने वाले सभी खिलाड़ियों को पैरा एथलेटिक्स कमेटी की ओर से सूचना भेजी गई थी। पैरालंपिक में हाईजंप के स्वर्ण पदक विजेता मरियप्पन थांगवेलू, जेवलिन के देवेंद्र झाझरिया, शॉटपुट की रजत पदक विजेता दीपा मलिक, हाईजंप के कांस्य पदक विजेता वरुण भाटी सभी को इसके बारे में बताया गया, लेकिन इनमें से कोई भी ट्रायल के दौरान साई सेंटर नहीं पहुंचा। साथ ही किसी की ओर से चीन व दुबई खेलने को लेकर अभी तक कोई जवाब भी नहीं दिया गया। इससे नेशनल पैरा एथलेटिक्स कमेटी ने देशभर से आए अन्य खिलाड़ियों का ट्रायल कराया और उनमें से चीन व दुबई के लिए खिलाड़ियों को चुना गया।
दुबई में होने वाली फाजा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप व चाइना ओपन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए ट्रायल रखा गया था। उसके लिए सभी खिलाड़ियों को बताया गया था, लेकिन पैरालंपिक में पदक जीतने वाला कोई भी खिलाड़ी नहीं आया। इसलिए उनमें से कोई दुबई व चीन में होने वाली इन चैंपियनशिप में नहीं खेल सकेंगे। ऐसा हो सकता है कि वह इन चैंपियनशिप में नहीं खेलना चाहते हों और इस कारण ही कोई सूचना भी नहीं दी गई।
-गिरिराज सिंह, चेयरमैन नेशनल पैरा एथलेटिक्स कमेटी