रिश्वत मांगने की शिकायत करके अधिकारियों व कर्मियों को रंगेहाथ पकड़वाने वाले खुद ही मुल्जिम बन गए हैं। यह ऐसे शिकायतकर्ता हैं जो रिश्वत देकर पकड़वाने के बाद कोर्ट में अपने बयान से मुकर गए। ऐसे तीन मामलों में शिकायतकर्ताओं को मुल्जिम बनाया गया है और उन पर भी कोर्ट में केस शुरू हो गया है। कोर्ट से उनको 193 के तहत नोटिस जारी करके उनको भी आरोपी बनाया गया है। इनमें एक फैक्ट्री मालिक समेत तीन लोग शामिल हैं। पहले ऐसे ही मामले में शिकायतकर्ता को एक साल कैद व एक हजार रुपये जुर्माने की सजा हो चुकी है।
किसी आम आदमी से कोई अधिकारी व कर्मचारी काम करने के लिए रिश्वत मांगता है तो उसकी शिकायत विजिलेंस में कर दी जाती है। इसके बाद शिकायत के आधार पर विजिलेंस की टीम उस अधिकारी व कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लेती है। इसमें केस दर्ज करके विजिलेंस अपना चालान कोर्ट में पेश कर देता है, लेकिन पिछले दिनों तीन मामले ऐसे आए, जिनमें दो साल पहले दर्ज हुए मुकदमों में शिकायत कर्ता कोर्ट में अपने बयानों से मुकर गए। यह उस हालात में हुआ, जब उनकी शिकायत के आधार पर आरोपियों को रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। उसके बावजूद शिकायतकर्ता के बयान बदलने पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। इन तीन शिकायतकर्ताओं को बयान बदलने के कारण 193 का नोटिस देकर आरोपी बना दिया गया है और उन पर भी केस चलाया जाएगा। यह माना जा रहा है कि यह सभी शिकायत कर्ता बाद में रिश्वत लेने वालों के साथ मिलकर अपने बयान बदल रहे हैं।
विजिलेंस के इंस्पेक्टर राजीव सोनी ने बताया कि कोई शिकायतकर्ता अपने बयान से कोर्ट में पलटता है तो कोर्ट उस पर कार्रवाई कर सकती है, क्योंकि आरोपी को रंगेहाथ पकड़ा जाता है और उसमें सभी सबूत कोर्ट में पेश किए जाते हैं।
केस एक:
बुटाना गांव के अंजीत की शिकायत पर 19 जून 2014 को बुटाना से बिजली निगम के लाइन मैन सोमबीर को चार हजार की रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। इसका केस कोर्ट में चल रहा है और उसमें अब शिकायतकर्ता अजीत अपने बयान से पलट गया है।
केस दो:
कुंडली के एक फैक्ट्री मालिक विवेक गुप्ता की शिकायत पर 29 जून 2013 को लेबर ऑफिसर बलवान, इंस्पेक्टर अशोक, चालक संजय को 15 हजार की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। इसमें फैक्ट्री मालिक ने एक के पक्ष में अपने बयान बदल दिए, जिसे सभी के लिए हॉस्टाइल मानते हुए नोटिस जारी किया गया।
केस तीन:
राजुलगढ़ी के संदीप की शिकायत पर 26 सितंबर 2014 को एक पशु डाक्टर रघुबीर व सहायक जयदीप को 10 हजार की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। भैंस का इंश्योरेंस करने को लेकर यह रुपये मांगे गए थे। इसमें संदीप के बयान बदलने से उसे नोटिस दिया गया।
एक साल कैद व एक हजार जुर्माने की सजा भी हुई
खेड़ी दहिया के एक युवक ने सिटी थाने के एसआई को शिकायत करके 2012 में रिश्वत लेते हुए पकड़वाया था, जिसमें शिकायतकर्ता कोर्ट में अपने बयान से पलट गया था। उसे कोर्ट ने 193 का नोटिस देकर केस चलाया और उसे एक साल कैद व एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। हालांकि उसने सजा के खिलाफ दूसरी कोर्ट में अपील दायर की, लेकिन इससे यह साफ दिख रहा है कि रंगेहाथ रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने के बाद भी आरोपियों के बचाव में गवाही देने से शिकायत कर्ताओं पर भी शिकंजा कसा जाएगा।