नोटबंदी का असर अब आम जिंदगी पर पड़ता हुआ साफ नजर आने लगा है। सबसे ज्यादा दिक्कत कमजोर तबके व छोटे दुकानदारों को हो रही है। बाजार में दुकानों पर बिक्री एक तिहाई से भी कम रह गई है तो मजदूरों को दिहाड़ी न मिलने के कारण दो वक्त की रोटी नसीब नहीं हो रही है। अभी तक परिचितों को उधार में सामान दे रहे दुकानदारों ने भी हाथ खड़े करने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि उनके पास सामान मंगवाने के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसे में कब तक उधार दिया जा सकता है। वहीं, अनाजमंडी में मजदूरी करने वालों के सामने रोटी की समस्या आ खड़ी हुई हैं। बैंकों के पास नकदी न के बराबर है। नई करेंसी आ नहीं रही है। ऐसे में जिंदगी कैसे चलेगी इस बात को लेकर अमर उजाला ने जमीनी हकीकत जानी।
सरकार द्वारा 500 व 1000 रुपये की करेंसी बंद करने के बाद लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छोटेे दुकानदार, मजदूर व गृहणी सरकार के इस फैसले से परेशान हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत उस तबके को हो रही, जिसका बैंकों में खाता नहीं है। उन्हें रोजी-रोटी की चिंता सता रही है। नोटबंदी से निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। पुरानी मंडी में शोरूम बनाने वाले एक व्यापारी टोनी ने बताया कि सरकार ने पुरानी करेंसी बंद कर दी। नई करेंसी अभी आई ही नहीं है। दिहाड़ी मजदूर रोजाना नकद पैसे लेकर काम करते हैं। पिछले कई दिनों सेे बैंकों में नई करेंसी आ नहीं रही है तथा दिनभर नोट बदलवाने वालों की लाइन लगी रहती है। इस कारण उनके पास नकदी की दिक्कत है। पहले पुराने नोट देकर काम चल जाता था। अब पुराने नोट खत्म हो गए तो काम प्रभावित हो रहा है। मजदूरों ने काम पर आने से मना कर दिया है। ग्राहकों के पास नकदी नहीं, दुकानदार उधार की स्थिति में नहीं दुकानदार भी सरकार के इस फैसले से काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि पिछले एक सप्ताह में उनकी बिक्री घट कर एक चौथाई रह गई है। मेन बाजार में स्कूल ड्रेस की दुकान चलाने वाले दुकानदार हरजीत खट्टर ने बताया कि ग्राहक कई दिनों से दुकान पर ग्राहक ही नहीं आ रहे हैं। जो ग्राहक आते हैं, सबसे पहले पुराने नोट के बदले सामान देने की बात करते हैं। वे कई दिनों से पुराने नोट नहीं ले रहे हैं।
उनके पास जो ग्राहक आते हैं या तो 500 या 1000 रुपये का नोट दिखाते हैं या फिर उधार में सामान मांगते हैं। उसका कहना है कि उधार सामान देने कर स्थिती में वह नहीं है, जबकि नकद में सामान बिक नही रहा है। घर का खर्च चलाना भी कठिन हो गया है। छोटे नोट मिल नहीं रहे हैं। बैंकों द्वारा नोट बदले तो जा रहे हैं, लेकिन दिन भर लाइन में खड़े रहना उनके बस की बात नहीं है। इसलिए छोटे नोट लाने वालों को ही सामान बेचा जा रहा है। उधारी हुई बंद तो रोटी के पड़ने लगे लाले नकदी न होने से लोगों के सामने अब पेट भरने की भी समस्या आ गई है।
गृहणी सीता देवी का कहना है दुकानदारों ने उधार देना बंद कर दिया है। बैंकों से नकदी नहीं मिल रही है, जिस कारण रोटी खाने के भी लाले पड़ गए हैं। सीता का कहना है कि कई दिनों तक उसने केवल ज्यादा जरूरत का सामान खरीदा। अब जब उसके पास पैसे नहीं बचे और दुकानदार ने भी उधार देने से मना कर दिया है। ऐसे में उसके सामने दो वक्त की रोटी खाना भी कठिन सा काम हो गया है। मंडी में काम बंद, नहीं मिल रही दिहाड़ी अनाज मंडी में मजदूरों की भी हालत खराब होती जा रही है। मंडी में मजदूरी करने वाले मजदूर किरण कुमार व रमिंद्र का कहना है कि वे मंडी में फसल उतारने व लोडिंग का काम करते हैं। कई दिनों में अनाज मंडी में कामकाज न के बराबर हो रहा है, जिससे उनकी रोजी रोटी चलना मुश्किल हो गया है।
उनका कहना है कि बैंकों में उनके खाते नहीं हैं। वे रोज नकद कमाते हैं, उसी से दो वक्त की रोटी खाते हैं। अब उनके पास नकदी खत्म हो गई तो रोटी की भी दिक्कत आ गई है। बाजार में नहीं रहे ग्राहक दिन भर रेहड़ी पर जूस बेचने वाले राजेश का कहना है कि वह उत्तर प्रदेश से यहां आकर जूस की रेहड़ी लगाता है। एक सप्ताह पहले तक सब कुछ ठीकठाक चल रहा था। जब से सरकार ने 500 व 1000 रुपये के नोट बंद किए हैं, उनका भी धंधा चौपट हो गया है। इसी प्रकार अनाज मंडी में चाय की रेहड़ी चलाने वाले बलजीत का कहना है कि उसका बैंक में कोई खाता नहीं है। वह मंडी में आने वाले किसानों व आढ़तियों के सहारे अपना व परिवार का पेट पाल रहा था। अब नकदी ही नहीं आ रही है। आढ़ती बड़े नोट दिखा रहे हैं तो किसानों के पास भी छोटे नोट नहीं है।
खाली एटीएम पर भी उम्मीद लेकर आ रहे लोग शहर के एटीएम सोमवार को खाली नजर आए। नोटबंदी के कारण पैैदा हुआ संकट अब गहराता हुआ नजर आ रहा है। शहर के अधिकतर एटीएम जहां काम नहीं कर रहे, वहीं बाकी बचे एटीएम पर कैश खत्म हो चुका है। ऐसे में जो लोग ये उम्मीद लेकर एटीएम तक जा रहे हैं कि शायद कैैश मिल जाए, उनको सिवाय निराशा के कुछ हाथ नहीं लग रहा। ऐसे हालात में लोगों के लिए संकट खड़ा हो गया है कि वो आखिर किस तरह से दैनिक जरूरतों को पूरा करें। हालात जल्द सुधरते नहीं दिखते रविवार को बैंकों में 100 रुपये के नोट खत्म होने के बाद जहां एक्सचेंज व निकासी काउंटर बंद कर दिए गए थे।
यही हालात मंगलवार को भी नजर आएंगे क्योंकि प्राप्त जानकारी के अनुसार बैंकों में अभी तक कैश नहीं पहुंचा है। ऐसे हालात में लोगों को मंगलवार के दिन भी समस्याओं से दो-चार होना पड़ेगा। वहीं, बैंक कर्मचारियों को भय सताने लगा है कि अब अगर मंगलवार की सुबह तक कैश नहीं आया तो लोगों का गुस्सा उन पर फूट सकता है। मेवात व गुड़गांव में हुई पत्थरबाजी की खबरें सुनकर बैंक कर्मचारी भयभीत नजर आ रहे हैं।