अगले गन्ना पेराई सत्र में जिले के लोगों को यूपी का नहीं, बल्कि सोनीपत का भी गुड़ खाने को मिलेगा। अभी तक प्रदेश के लोग यूपी से आने वाले गुड़ का स्वाद ही चख रहे हैं। शुगर फेडरेशन की ओर से सोनीपत मिल में अगले सत्र में चीनी के साथ गुड़ बनाने का प्लान तैयार किया है। इसके लिए मिल प्रशासन ने 40 साल बाद मिल की पेराई क्षमता 900 टन और बढ़ाए जाने के लिए मुख्यालय को प्रपोजल भेजा है। मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने की मंजूरी मिलने पर अगले सत्र से गुड़ भी बनाए जाएंगे।
वर्ष 1976-77 में 1600 टन पेराई क्षमता वाली दी सोनीपत कोऑपरेटिव शुगर मिल को स्थापित किया था। इसमें हर साल करीब पांच लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई की जाती है। जिले में गन्ने की बिजाई ज्यादा होने के बावजूद मिल में पेराई कम होती है। इसके चलते किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मिल की पेराई क्षमता को बढ़वाने के लिए किसानों की ओर से मिल प्रशासन व जिला प्रशासन की ओर से कई बार मांग भी की जाती रही है, ताकि गन्ना उत्पादक किसानों को परेशानी न हो।
1600 की जगह 2500 टन पेराई क्षमता करने का प्रपोजल
मिल प्रशासन के अनुसार 40 साल से लगातार 1600 टन गन्ने वाली पेराई क्षमता में 1800 टन गन्ने की पेराई की जा रही है, ताकि समय रहते किसानों का गन्ना मिल में आ सके। मिल प्रशासन की ओर से 900 टन और पेराई क्षमता बढ़ाने के लिए प्रपोजल शुगर फेडरेशन को भेजा गया है। अगर मिल की पेराई क्षमता 2500 टन हो जाती है तो चीनी के साथ गुड़ बनाना संभव होगा।
मिल प्रशासन की ओर से मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने के लिए प्रपोजल मुख्यालय भेज दिया गया है। वहां से अगर मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने की मंजूरी मिल जाती है तो यहां पर गुड़ का प्लांट संभव है। मिल में गुड़ का प्लांट लगाने के लिए शुगर फेडरेशन भी विचार कर रहा है।
-डॉ. सुभिता ढाका, प्रबंध निदेशक, शुगर मिल, सोनीपत