फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

योग धर्म-विशेष की परंपरा नहीं, जीवनशैली अपनाने की विशेष कला है

Wed, 22 Jun 2016 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
विज्ञापन
सांसद रमेश कौशिक को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित करते स्वामी आर्यवेश। - फोटो : bureau
विज्ञापन
योग किसी धर्म-विशेष की परंपरा नहीं है। बल्कि मानव के लिए जीवनशैली अपनाने की विशेष कला है। योग के आठ अंगों में कोई एक भी अंग ऐसा नहीं है जो किसी धर्म या मजहब के प्रति संकीर्णता दर्शाता हो। यह बात आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष स्वामी आर्यवेश ने कही। वह सार्वदेशिक आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में सुभाष स्टेडियम में आयोजित प्रांतीय योग समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे। कार्यक्रम के दौरान हजारों की संख्या में योग अभ्यर्थियों ने योगाभ्यास किया। इसमें कई स्कूलों के विद्यार्थी भी शामिल थे। सामूहिक योग परिषद के आचार्य प्रवीण कुमार आर्य ने करवाया।
विज्ञापन



कार्यक्रम में मौजूद बतौर मुख्य अतिथि रमेश कौशिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज विश्वभर में योग की अपनी पहचान है और इससे भारत की भी पहचान है। बच्चे-बूढ़े, जवान सभी को योग अपनाना चाहिए। योग से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं। इस दौरान विशिष्ट अतिथि भाजपा नेता ललित बतरा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम का संचालन दून पब्लिक स्कूल के आजाद सिंह बांगड़ ने किया। इस मौके पर परिषद के महामंत्री बिरलानंद, दीक्षेंद्र आर्य, ओमप्रकाश गर्ग, भाजपा नेता ललित बत्रा, टीकाराम मित्तल, सरदार विक्रम सिंह, विनोद तायल, मास्टर भगवान सिंह, जयसिंह ठेकेदार आदि मौजूद रहे।

सर्वधर्म एकता का दिया संदेश
सम्मेलन में सार्वदेशिक आर्य युवक परिषद की ओर से सर्वधर्म एकता का संदेश दिया गया। इसके लिए सिख, मुस्लिम, जैन, ईसाई और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के अलावा सनातन धर्म सभा, अग्रवाल समाज और दूसरे सामाजिक और धार्मिक संगठनों के सदस्यों ने भी भाग लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें