फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गांव की जमीन को गोचारण के लिए छोड़ा जाए

Mon, 20 Jun 2016 12:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
विज्ञापन
दिपालपुर गांव में ग्रामीणों को सम्बोधित करते संत रामगोपाल - फोटो : bureau
विज्ञापन
 दीपालपुर गांव को नगर निगम में शामिल करने के विरोध में ग्रामीणों ने अपना आंदोलन तेज कर दिया। ग्रामीणों की गांव के शिव मंदिर में आंतिल चौबीसी की बैठक हुई। जिसमें खाप के प्रधान हवा सिंह ने अध्यक्षता की। बैठक में गौचारण की जमीन को बचाने के लिए अपना समर्थन देते हुए कहा निगम को गांव की जमीन को छोड़ देना चाहिए। वहीं विवाद को देखते हुए डीसी केएम पांडुरंग ने दीपालपुर के ग्रामीणों को सोमवार को बातचीत के लिए बुलाया है।   
विज्ञापन

बैठक में ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि गौचारण और अपने गांव की जमीन को नगरनिगम में जाने से बचाने के लिए हर गांव से दो व्यक्तियों को कमेटी में शामिल किया गया है। खाप के प्रधान हवा सिंह ने बताया कि ये कमेटी हर तरह की समस्या के समाधान के लिए तैयार रहेगी। संत रामगोपाल ने कहा कि गौचारण जमीन को बचाने के लिए वे ग्रामीणों का पूरा सहयोग करेंगे। इसी बात का ग्रामीणों ने पूर जोर सर्मथन करते हुए जमीन बचाने के मामले में किसी भी सूरत में पीछे न हटने की बात कही। ग्रामीणों ने चेताया कि जब तक उनके गांव को नगरनिगम से हटाया नही जाएगा, वे इसका विरोध करते रहेंगे और उनका धरना जारी रहेगा। ग्रामीणों ने कहा कि सरकार को उनकी समस्या का समाधान करना चाहिए।

ग्रामीणों ने नही किया बोलीदाताओं का विरोध: हवासिंह
आंतिल खाप के प्रधान हवासिंह ने बताया कि ग्रामीणों ने नगरनिगम की जमीन की बोली देने वाले लोगों का विरोध नहीं किया। ग्रामीणों ने केवल गौचारण की जमीन पर गांव की गौशाला की गौमाता के लिए हरे चारे की रोपाई की है। दीपालपुर और आसपास के गांवों के लोग इसके समर्थन में हैं। जमीन में उन्होंने गौशाला के लिए मक्का, ज्वार और बाजरा की बिजाई कर दी।
विज्ञापन


ग्रामीण बोले, गौचारण जमीन पर नहीं होने देंगे निगम का कब्जा
दीपालपुर के ओम आंतिल, महेंद्र सिंह, एडवोकेट कुलदीप, महेंद्र सिंह, जयेंद्र सिंह, रणवीर, पूर्व सरपंच रामपत, रतन सिंह, आनंद सिंह, चंदरूप, हवासिंह पहलवान, कुलदीप आंतिल, जयभगवान आंतिल ने कहा कि जमीन दीपालपुर गांव की गौचारण भूमि है। जमीन की निगम ने बोली करा दी थी। वे किसी भी सूरत में जमीन पर निगम का कब्जा नहीं होने देंगे। जब उनका गांव नगर निगम में शामिल नहीं होना चाहता तो सरकार दबाव क्यों बना रही है। पूरा गांव एकजुट होकर इसका विरोध कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें