सोनीपत-गोहाना-जींद रेलमार्ग का नक्शा।
- फोटो : bureau
सावधान! आगे करोड़ों की लागत से बना सपनों की रेल का ट्रैक है। वो ट्रैक जिसके 60 प्रतिशत से अधिक फाटक मानवरहित हैं। जानकारों की मानें तो इस ट्रैक पर अगर दो बार भी ट्रेन दौड़ी तो कम से कम दो हादसे होने तय हैं। इस ट्रैक पर मानवरहित फाटक के चलते खतरे का नमूना शुक्रवार शाम के समय पिनाना गांव के पास सबके सामने आ गया। जब एक ट्रायल इंजन की चपेट में आने से ईको सवार दो लोगों की मौत हो गई। बता दें कि इस रेलवे ट्रैक पर दो दिन बाद ही रेल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। स्वयं रेलमंत्री सुरेश प्रभु चंडीगढ़ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए दोपहर 2.30 बजे हरी झंडी दिखाकर रेल को रवाना करेंगे। ऐसे में अब देखना यह है कि उद्घाटन से पहले ही हुए हादसे से रेलवे सबक लेगा या फिर ऐसे ही लोगों के असमय काल का ग्रास बनने में मददगार होगा। अधिकारियों की बात करें तो वे भी इस बारे में कुछ नहीं बोल रहे।
एक नजर में सोनीपत-गोहाना-जींद रेलमार्ग
सोनीपत-गोहाना-जींद रेलमार्ग महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसके जरिए 70 के करीब गांवों को सीधा फायदा होगा। वर्ष 2007 में इस लाइन का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। 750 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट वर्ष 2015 में पूरा हुआ था। इस रेलवे ट्रैक की लंबाई 89 किलोमीटर है।
ग्रामीण रखें खास ख्याल
बता दें कि इस रेलवे ट्रैक पर 60 प्रतिशत से अधिक फाटक मानवरहित हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी हजारों ग्रामीणों को हो सकती है। ट्रैक का अधिकतर हिस्सा खेतों में ही है। गांवों में किसान तथा अन्य ग्रामीणों का खेतों में आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन के आने-जाने का पूरा ख्याल रखना होगा। नहीं तो हादसा होने के पूरे चांस बनेंगे।
प्रयास रहेगा कि जल्द मानवरहित फाटकों को हटाया जाए। 26 को रेल शुरू की जाएगी। हर एक फाटक पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। हर राहगीर को दोनों तरफ देखकर ही ट्रैक पार करना चाहिए।
-एसके गौड़, चीफ इंजीनियर