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गरीबों का गेहूं भर रहा अमीरों का पेट

Fri, 13 May 2016 12:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
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थाना सदर में खड़ा सरकारी गेहूं का ट्रक। - फोटो : bureau
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जिस गेहूं को गरीब का निवाला बनना था, वो अमीरों के पेट को भर रहा था। जो गेहूं गरीब लोगों को 2 रुपये किलो मिलना था, वो ही गेहूं चक्कियों पर पिसने के बाद 27 रुपये बेचा जा रहा था। इतना बड़ा मार्जन कमा रहे थे आरोपी चक्की वाले। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि इतनी कमाई बिना किसी सरकार शहर के कैसे हो सकती है। इसी शह की तलाश में पुलिस की टीम जुट गई है। बताया जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में एफसीआई (फूड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया) के दो कर्मचारियों पर गाज गिरनी तो तय है ही, वहीं कई अन्य भी लपेटे में आ सकते हैं। आरोपी दोनों ही कर्मचारी रात से ही फरार हैं। खास बात यह है कि इन चोरों, सप्लायर और चक्की मालिकों को बचाने के लिए शहर के कुछ नामचीन लोग देर रात ही सक्रिय हो गए थे। जिनमें से एक व्यापारी नेता देर रात ही थाना सदर में पहुंचकर बीचबचाव की कोशिश करते नजर आए। इतना ही नहीं बात मोलभाव तक आ गई थी, लेकिन बात सिरे नहीं चढ़ पाई। बता दें कि इन्हीं नेता ने अति आत्मविश्वास में गेहूं चोरी कैसे हुआ उसकी कहानी भी बता दी। हालांकि बाद में जब मामला थाना सिविल लाइन में चला गया तो व्यापारी नेता भी गायब हो गए। वहीं दूसरी ओर सरकारी गेहूं की चोरी का एक तरीका पुलिस भी बता रही है, लेकिन उसमें कहीं न कहीं पेंच अड़ जाते हैं।
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यह हैं चोरी के दो तरीके
रिकॉर्ड में गड़बड़ी
जिस राज्य में गेहूं की आपूर्ति करनी होती है, उसकी जिम्मेदारी एफसीआई की होती है। इसीलिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा खरीदा गया गेहूं एफसीआई को हैंडओवर किया जाता है। यहां गेहूं की बोरी गिनने के बाद लोडेड वाहन का वजन कराया जाता है और उसके बाद एफसीआई के कर्मचारियों को सौंप दिया जाता है। एफसीआई इसी गेहूं को ट्रेन के जरिए बाहर भेजती है। जब गेहूं ट्रेन में चढ़ाया जाता है, उस समय कर्मचारी रिकॉर्ड में हेराफेरी कर गेहूं की चोरी कर लेते हैं। चोरी किए हुए कट्टे चक्कियों पर बेचे जाते हैं।

बचा हुआ गेहूं भरना
पुलिस सूत्रों की मानें तो प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि जब गेहूं आता है तो उस समय वाहन में तीन-चार कट्टे ऐसे होते हैं, जो फट जाते हैं। इनका गेहूं गाड़ी में बिखर जाता है, इस गेहूं को इकट्ठा कर लिया जाता है और दो-तीन गाड़ियों से पांच-छह कट्टे गेहूं तैयार कर लिए जाते हैं। कई बार जानबूझकर भी कट्टों को फाड़ दिया जाता है, ताकि गेहूं के कट्टे तैयार हो सकते हैं। हालांकि इस तरीके से चोरी करने के बाद गेहूं को सरकारी मोहर वाले कट्टे नहीं मिल सकते हैं, क्योंकि यह तो सरकारी गेहूं की निशानी है।
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48 घंटे में आता है रिकॉर्ड, कल तक स्थिति होगी साफ
बता दें कि फूड सप्लाई द्वारा भेजे गए गेहूं का रिकॉर्ड 48 घंटे बाद मिल पाता है। क्योंकि ट्रेन जहां भी जाती है, वहां पर रिसीव करने के बाद रिकॉर्ड दिया जाता है कि कितने कट्टे थे और कितना वजन था। मामला बुधवार शाम का है, इस लिहाज से शुक्रवार शाम तक रिपोर्ट मिल जाएगी। पुलिस भी रिकार्ड को कब्जे में लेकर तफ्तीश करेगी।

सेटिंग करने पहुंचे थे व्यापारी नेता
मामले की भनक लगते हुए शहर के कुछ नामचीन लोग सक्रिय हो गए थे। सेटिंग के लिए एक व्यापारी नेता को भी भेजा गया था। यह नेता सीधे थाना सदर में पहुंचे और पंचम नगर के लोगों से बातचीत भी की, लेकिन कोई असर न होते देख मजबूरन खिसक लिए। बता दें कि ये व्यापारी नेता अपने एक साथी के साथ व्हाट्सएप वार के चलते काफी प्रसिद्ध हुए थे। इसके अलावा इनके संगठन में कुछ समय पहले इन्हें गैर निर्वाचित और थोपा गया नेता भी बताया गया था।
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