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सभी जिला अस्तपालों में आईसीयू, एचडीयू और ट्रामा सेंटर दो वर्षों में

Fri, 29 Apr 2016 12:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
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आपातकालीन विभाग में दवाई चेक करती टीम - फोटो : bureau
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अगले दो वर्षों में सभी जिला अस्पतालों में आईसीयू (इंटेसिव केयर यूनिट) और एचडीयू (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) के साथ-साथ ट्रामा सेंटर की सुविधा देना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की प्राथमिकता है। साथ ही इन ट्रामा सेंटरों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति भी की जाएगी। यह बात मिशन के अतिरिक्त प्रधान सचिव सीके मिश्र ने कही। वह गुरुवार को नागरिक अस्पताल का निरीक्षण करने के उपरांत सिविल सर्जन कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।   
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अतिरिक्त प्रधान सचिव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए माना कि अस्पताल में कुछ सुविधाएं नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी इनमें से प्रमुख है। ट्रामा मरीजों को यहां से रेफर करना पड़ता है। वहीं अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन तो है, लेकिन इसको चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। जिसके चलते मरीजों को बाहर से भारी दामों पर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है। रेडियोलॉजिस्ट के संबंध में सिविल सर्जन डॉ. जेएस पूनिया से पूछने पर उन्होंने बताया कि वह यहां से छह महीने पहले डेपुटेशन पर गए हैं। इसी के चलते दिक्कत आ रही है। इस अवसर पर एनएचएम हरियाणा के एमडी राजीव रतन, जिला उपायुक्त के. मकरंद पांडुरंग, सीएमओ डॉ. जेएस पूनिया, डिप्टी सीएमओ डॉ. महेंद्र, डिप्टी सीएमओ डॉ. आदर्श शर्मा सहित सभी चिकित्सक मौजूद थे।

शिशु मृत्यु दर व मातृ मृत्यु दर को कम करने का दिया जोर
अतिरिक्त प्रधान सचिव ने देश की स्वास्थ्य सेवाओं पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि देश में हर साल 45 हजार महिलाओं की मौत डिलीवरी के दौरान हो जाती है और हर साल साढ़े 12 लाख नवजात बच्चों की होती है। इसमें कमी लाना सबसे बड़ी चुनौती है। हरियाणा में शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर में जबरदस्त सुधार हुआ है। अब 99 प्रतिशत संस्थागत डिलीवरी हो रही हैं और इनमें से 70 प्रतिशत डिलीवरी सरकारी अस्पतालों में हो रही है। देश में नवजात बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से ही पोलियो इंजेक्शन व रोटवायरस जैसी दवा को बच्चों के टीकाकरण में शामिल किया गया है। हरियाणा में जन्म के तुरंत बाद बच्चों को मां का दूध पिलाने के विषय में गंभीरता से कदम उठाना होगा। अगर जन्म के एक घंटे बाद मां का दूध बच्चे को पिलाया जाए तो नवजात बच्चों की मृत्यु दर में 30 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।
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सरकारी ही नहीं निजी अस्पतालों में भी है चिकित्सकों की भारी कमी
अतिरिक्त प्रधान सचिव सीके मिश्र ने बताया कि देश में हर वर्ष 56 से 57 हजार बच्चे एमबीबीएस करते हैं और इससे आधे ही एमडी तक पहुंच पाते हैं। इनमें से 50 प्रतिशत से कम नौकरी में हैं। ऐसे में सरकारी ही नहीं बल्कि निजी अस्पतालों में भी चिकित्सकों की भारी कमी है। इसे दूर करने के लिए प्रदेश सरकार की मदद से मेडिकल कॉलेज और सीटों की संख्या बढ़ाने का काम किया जा रहा है। वहीं डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए मेडिकल कॉलेजों की संख्या में इजाफा करना होगा। साथ ही तत्काल राहत देने के लिए नर्स प्रेक्टिशनर और आयुर्वेद डॉक्टरों को भी बेहतर कार्य करने के लिए प्रशिक्षित और प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मेडिकल कालेजों में सीटें बढ़ाने पर दिया जा रहा जोर
अतिरिक्त प्रधान सचिव ने कहा कि देश के हर जिला हॉस्पिटल में बेहतर सुविधा प्रदान करने के लिए योजना तैयार हो चुकी है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयास जारी है, जिसमें देश के हर जिला हॉस्पिटल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने पर ध्यान दिया जा रहा है। उसके साथ ही देश में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए मेडिकल कालेज में सीटों को ज्यादा करने पर भी काम किया जा रहा है।

नागरिक अस्पताल में सुविधाएं बढ़ाने पर दिया जोर
इससे पूर्व एनएचएम के अतिरिक्त प्रधान सचिव सीके मिश्र ने अधिकारियों के साथ नागरिक अस्पताल में दौरान किया। सबसे पहले उन्होंने आपातकालीन वार्ड का जायजा लिया। वहां पर स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित मरीजों से जानकारी हासिल की। वहीं उसके बाद ब्लड बैंक में जाकर रक्त यूनिट के बारे में जाना। मरीजों को समय पर ब्लड उपलब्ध करवाने के लिए निर्देश दिए। वहीं ओपीडी में जाकर मरीजों से बातचीत की और प्रदेश सरकार की ओर से चालू किए गए ऑनलाइन सिस्टम के बारे में जाना।

पेयजल को लेकर पब्लिक हेल्थ से संपर्क करने के दिए आदेश
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके महापात्रा ने कहा कि नागरिक अस्पताल में पेयजल सुचारु रूप से मुहैया कराने के लिए पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों से संपर्क साधा जाए। पेयजल की जिम्मेवारी डीसी के मकरंद पांडुरंग को सौंपी गई।

प्रसूति वार्ड में जाकर महिलाओं से की बातचीत
टीम ने अस्पताल के प्रसूति वार्ड में जाकर यहां पर आने वाली महिलाओं से बातचीत की और यहां पर महिलाओं के लिए ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं बढ़ाए जाने के निर्देश दिए। टीकाकरण कक्ष में जाकर बच्चों और महिलाओं को लगने वाले टीके के बारे में पूछा तो चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सीपी अरोड़ा ने बताया कि आई-पिल टीके को खरीदकर गर्भवती महिलाओं को लगाया जाता है। यह टीका गर्भ के दौरान लगता है। इस पर पीके महापात्रा ने इस टीके को मुफ्त में उपलब्ध करवाने के लिए मुख्यालय को लिखने के आदेश दिए। उसके बाद आयुर्वेद कार्यालय का जायजा लिया।
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