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14 लाख का गर्वनर खरीदा, नहीं लगाने से टरबाइन फटा, मिल बंद, 6 लाख क्विंटल गेहूं फंसा

Thu, 06 Apr 2017 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो सोनीपत।
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किसानों से बातचीत करते बोर्ड ऑफ डायरेक्टर सुरेश व राजकुमार दहिया - फोटो : bureau
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शुगर मिल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही के कारण टरबाइन फट गई। हालांकि इससे कोई हताहत भले ही नहीं हुआ हो, लेकिन शुगर मिल बंद होने से 20 हजार किसानों का लगभग छह लाख क्विंटल गन्ना फंस गया है। यहां 14 लाख का गवर्नर खरीदा गया, लेकिन उसे टरबाइन में नहीं लगाया गया, जिससे वह फट गया। अब मिल को जल्द शुरू नहीं किया जा सकता है। टरबाइन को ठीक करने में कई महीने लगेंगे और उसमें लाखों रुपये का खर्च आएगा। मिल के अंदर आया हुआ लगभग 20 हजार क्विंटल गन्ना सूखने लगा है, जिसको अन्य किसी जगह भेजने की तैयारी की जा रही है। वहीं, डीसी ने टरबाइन फटने के मामले में शुगर मिल डायरेक्टरों के लापरवाही के आरोपों को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। गन्ने को अंबाला के प्राइवेट मिल में डलवाने की मंजूरी मिल गई है। गन्ने को वहां किस तरह से भेजा जाएगा, उसके लिए वीरवार को फिर से अधिकारियों की मीटिंग होगी।
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तेज धमाके के साथ मची अफरा-तफरी
सोनीपत शुगर मिल में सोमवार शाम को तेज धमाका हुआ, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। शुगर मिल की बत्ती पूरी तरह से गुल हो गई। मिल कर्मचारियों ने जाकर देखा तो टरबाइन फट गया था और उसके पार्ट्स बिखरे पड़े थे। वहां छानबीन करने पर पता चला कि स्पीड बढ़ने के कारण टरबाइन फटा है और वह जल्द ठीक नहीं हो सकती। इसकी सूचना अधिकारियों को दी गई और इंजीनियर बुलाकर टरबाइन की जांच कराई गई।
कम से कम एक माह लगेगा ठीक होने में
इंजीनियरों ने बताया कि टरबाइन को ठीक होने में एक महीने से ज्यादा समय लगेगा और उस समय तक मिल बंद रहेगी। वहीं, टरबाइन को ठीक करने में खर्चा भी 50 लाख से ज्यादा आने की बात कही जा रही है। इसके बाद से शुगर मिल बंद पड़ा हुआ है, जबकि अभी मिल एक महीना चलना था। मिल से जुड़े लगभग 20 हजार किसानों का छह लाख क्विंटल गन्ना खेतों में खड़ा हुआ है जो किसानों को मिल पर डालना है। मिल के अंदर भी लगभग 20 हजार क्विंटल आया हुआ है जो वहां गर्मी के कारण सूखने लगा है।
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टरबाइन की स्पीड कंट्रोल करता है गवर्नर
मिल नहीं चलने के कारण किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया तो अधिकारियों ने इसका विकल्प तलाशना शुरू कर दिया। डीसी केएम पांडुरंग ने बुधवार शाम को मिल की एमडी डॉ. सुभिता ढाका व मिल डायरेक्टरों के साथ मीटिंग की, जहां डायरेक्टरों ने आरोप लगाया कि मिल प्रबंधन व कर्मचारियों की लापरवाही से टरबाइन फटा है। टरबाइन में लगाने के लिए लगभग 14 लाख रुपये का गवर्नर खरीदकर रख लिया गया, लेकिन उसे लगवाया नहीं गया। डायरेक्टर राजकुमार दहिया ने डीसी से कहा कि वह गवर्नर ही टरबाइन की स्पीड को कंट्रोल करता है और उसे स्पेयर में रखने की जगह पहले ही बदलवा दिया जाता तो इस तरह का हादसा नहीं होता। इस पर डीसी ने मामले की जांच कराने की बात कही और किसानों के खेत में खड़े गन्ने को अंबाला के नारायणगढ़ में प्राइवेट मिल में डलवाने के लिए कहा। उसके लिए किसानों को प्रति कुंतल 20-25 रुपये ज्यादा दिया जाएगा। लेकिन किसानों ने इतनी दूर गन्ना लेकर जाने से इंकार कर दिया और कहा कि उस रुपये से मिल प्रबंधन खुद ही किसानों का गन्ना नारायणगढ़ मिल तक पहुंचवाए। इसको लेकर अभी सहमति नहीं बन सकी और इस पर बातचीत करने के लिए वीरवार को शुगर मिल में बोर्ड ऑफ डायरेक्टरों की अधिकारियों के साथ बैठक होगी, जिसमें तय होगा कि गन्ना मिल तक कैसे पहुंचेगा।
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डीसी से सीधी बात
सवाल : मिल डायरेक्टरों ने प्रबंधन की लापरवाही से टरबाइन फटने का आरोप लगाया है, क्या कार्रवाई की जा रही है?
डीसी : डायरेक्टरों ने प्रबंधन व कर्मचारियों की लापरवाही की बात कही है। जांच शुरू कर दी गई है और मैं खुद जांच करूंगा।
सवाल : डायरेक्टरों ने लगभग 14 लाख का गवर्नर खरीदकर रखने की बात कही है, जिसे लगाया जाता तो हादसा नहीं होता?
डीसी: यह बात सामने आई है और इसको भी जांच में शामिल किया जाएगा। इसमें इंजीनियरों के सहारे जांच की जाएगी।
सवाल : किसानों के खेतों में काफी गन्ना खड़ा है, उसका क्या समाधान निकाला गया?
डीसी : किसानों का पूरा गन्ना मिल पर डलवाया जाएगा, जिसके लिए अंबाला के नारायणगढ़ मिल में बात हो गई है।
सवाल : वहां गन्ना कैसे पहुंचेगा, किसान कैसे लेकर जाएंगे?
डीसी : गन्ना वहां लेकर जाने के लिए किसानों को 20-25 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा दिया जाएगा, किसी का गन्ना नहीं बचेगा।
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