भारतीय टीम जिस तरह लगातार कबड्डी की वर्ल्ड चैंपियन बन रही है, उसको देखते हुए ही कबड्डी खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए कबड्डी के नए खिलाड़ी तैयार करने के लिए विदेशी तकनीकों को अपनाया जा रहा है। इससे अपनी तकनीकों के साथ ही विदेशी तकनीक अपनाकर खिलाड़ियों को ज्यादा बेहतर प्रैक्टिस कराई जा सकेगी।
हरियाणा में सबसे ज्यादा कबड्डी खिलाड़ी होने के कारण इसकी शुरुआत भी यहां से की जाएगी। इसमें सबसे पहले साई के सोनीपत सेंटर में विदेशों की तरह हॉल व मैट तैयार कराया जा रहा है और इस पर ही कबड्डी खिलाड़ी प्रैक्टिस करेंगे। एक माह में ये तैयार हो जाएगा, जिसके बाद यहां के खिलाड़ी मैट पर प्रैक्टिस कर सकेंगे। फिलहाल यहां अभी तक अधिकतर जगह खुले मैदान में कबड्डी की प्रैक्टिस कराई जाती है, जबकि विदेशों में कुश्ती की तरह कबड्डी मैट पर होती है। वहीं, कबड्डी की बड़ी चैंपियनशिप हमेशा बंद हॉल में होती है। इन सभी चीजों का खेल पर असर पड़ता है, क्योंकि खुले में जमीन पर प्रैक्टिस करने के बाद हॉल में मैट पर खेलने से कई बार खेल प्रभावित हो जाता है। ऐसे में साई ने अपने सेंटरों पर प्रैक्टिस करने वाले कबड्डी खिलाड़ियों के लिए हॉल व मैट की व्यवस्था कराई है। इनके अलावा भी कुछ अन्य ऐसी सुविधाएं कबड्डी खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के लिए मिलेंगी, जिससे उनका खेल ज्यादा बेहतर हो सके।
बड़ी चैंपियनशिप बंद हॉल में होती हैं
इस समय भारत के मुकाबले में केवल ईरान की टीम ही टिक पाती है, लेकिन भविष्य को देखते हुए यह पूरी व्यवस्था हो रही है। यह भी देखा जा रहा है कि कबड्डी खिलाड़ियों के लिए और क्या बेहतर किया जा सकता है, उनको भी चलन में लाया जाएगा। इस तरह से विदेशों व बड़ी चैंपियनशिप में कबड्डी बंद हॉल में मैट पर खेली जाती है। साई के सेंटर में उस तरह की तैयारी की जा रही है और इस पर काम भी किया जा रहा है। हॉल को पूरी तरह से बंद नहीं रखा जाएगा, लेकिन कुछ उसी तरह से बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उसमें मैट भी होगा, जिससे कबड्डी खिलाड़ी उस मैट का इस्तेमाल कर सकेंगे।
-संजय सारस्वत, डायरेक्टर, साई सेंटर राई