जिले की सीमा से गुजर रहे हाईवे पर आए दिन हादसे होना आम बात है। बीते 15 दिन में हाईवे पर छह लोगों की मौत हो चुकी है। इन हादसों का सबसे अधिक शिकार हो रहे हैं जीटी रोड के किनारे बसे गांवों के ग्रामीण। औसतन हर दो दिन में हाईवे पर एक जान जा रही है। जिले की सीमा में करीब 30 किलोमीटर क्षेत्र में जीटी रोड गुजर रहा है। जिले के एक दर्जन गांव जहां जीटी रोड के किनारे बसे हैं, वहीं दो दर्जन गांव जीटी रोड की दो से तीन किलोमीटर की परिधि में हैं। ऐसे में इन गांवों के हजारों ग्रामीणों को प्रतिदिन नौकरी से लेकर शिक्षण संस्थान तक में जाने के लिए जीटी रोड को पार करना पड़ता है। इससे यहां के लोगों को हर समय तेज वाहनों के सामने अपनी जिंदगी को सकुशल बचाए रखने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। यहां लोगों की जिंदगी को बचाने के लिए फुट ओवरब्रिज व अंडरपास बनाए जाने की सबसे अधिक आवश्यकता है। यहां के ग्रामीण इसकी मांग कई बार कर चुके हैं, लेकिन मांग अब तक पूरी नहीं हो पा रही है।
हाईवे पर बेलगाम भागते हैं वाहन
जीटी रोड पर चलने वाले वाहनों की रफ्तार 60 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है, लेकिन कई वाहन चालक 100 से 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ड्राइविंग करते दिख जाते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के सामने लोगों के लिए जीटी रोड पार करना बेहद खतरनाक होता जा रहा है। इसके साथ ही जीटी रोड पर वाहनों की संख्या में भी पिछले तीन से चार वर्ष के अंतराल में काफी तेजी से वृद्धि हुई है। इससे मार्ग के साथ गांवों में बसे लोगों की मुश्किल भी बढ़ गई है।
इन गांवों के ग्रामीणों पर मंडराता है खतरा
सोनीपत की सीमा में जीटी रोड के किनारे कुंडली, प्याऊ मनियारी, रसोई, राई, बहालगढ़, लड़सौली, बड़ी, टेहा, गढ़ी कलां व पांची गुजरान गांव बसे हैं। इसके साथ ही करीब दो दर्जन से अधिक गांव मात्र दो किलोमीटर की परिधि में बसे हैं।
वृद्धों, महिलाओं व बच्चों को सबसे अधिक परेशानी
जीटी रोड के किनारे बसे गांवों के ग्रामीणों को दिन में कई-कई बार जीटी रोड को पार करने की मजबूरी हो जाती है। ऐसी स्थिति में उनके सामने जान जोखिम में डालकर मार्ग को पार करने के बजाय कोई रास्ता नहीं होता। इसमें सबसे बुरी स्थिति को वृद्धों, महिलाओं व स्कूली बच्चों के सामने आती है। उनके साथ हादसा होने का सबसे अधिक डर बना रहता है।
करना पड़ता है इंतजार
जीटी रोड पर बसे गांवों के ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी समस्या जीटी रोड की लेनों को पार करना है। अंधेरा होने की स्थिति में यह अधिक परेशानी भरा हो जाता है। जीटी रोड पार करने के लिए पहले राहगीर को एक चार लेन पार करनी पड़ती है। इसके बाद वह दोनों मार्गों के बीच डिवाइडर पर पहुंच जाता है। यहां भी कई बार सड़क पार करने के लिए राहगीर को लंबा इंतजार करना पड़ता है। जीटी रोड के किनारे व कुछ सीमा में बसे गांवों के लोगों की जिंदगी को बचाने के लिए फुट अंडरब्रिज व अंडरपास काफी सहायक साबित हो सकते हैं। जीटी रोड के किनारे बसे गांवों के सामने फुट अंडरब्रिज व अंडरपास बनाए जाने के बाद यहां के ग्रामीण आसानी से जीटी रोड को पार कर सकेंगे।
हादसों से बचाने के लिए हो ठोस प्रबंध
गांव राई निवासी खेमचंद कौशिक, राजेश, सुनील कौशिक, देवदत्त त्यागी कहते हैं कि जीटी रोड पर बसे गांवों के ग्रामीणों को हादसे का डर हर समय सताता है। उन्होंने कहा कि लोगों को हादसों से बचाने के लिए ठोस प्रबंध किए जाने की आवश्यकता है। वहीं, असारपुर निवासी दिनेश, बढ़मलिक निवासी वेदपाल शास्त्री, कुंडली निवासी मुखत्यार खान कहते हैं कि जीटी रोड पर आए दिन हादसों का ग्राफ बढ़ रहा है। इसे रोकने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार के साथ ही स्थानीय प्रशासन को भी पहल करनी चाहिए, जिससे सड़क पर बह रहे लोगों के खून को बचाया जा सके। इसके लिए फुट अंडरब्रिज व अंडरपास की व्यवस्था की जानी चाहिए।
जल्द शुरू होगा काम
हाईवे पर लगातार बेहतरी के प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों की सुरक्षा के लिए सभी प्रयास हो रहे हैं। इसके लिए हाईवे पर विभिन्न स्थानों पर नौ अंडरपास, ओवरब्रिज व फुट ओवरब्रिज पास कराए गए हैं, जिन्हें बनवाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
-रमेश कौशिक, सांसद