अपनी माता सुमित्रा की चिता को मुखाग्नि देती ज्योति व लीना।
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शहर के चार मरला की दो बहनों ने अपनी मां की अंतिम यात्रा को कंधा देकर बेटों का धर्म निभाया। वहीं, दोनों बेटियों ने ही मां की चिता को भी मुखाग्नि दी और अंतिम संस्कार की हर रस्म निभाई। दोनों ने अपनी मां के नेत्र भी दान कराए, ताकि मरने के बाद भी उनकी माता के नेत्र किसी को रोशनी दे सकें। दोनों बहनों ने कहा कि बेटियां बेटों से कम नहीं हैं।
शहर के ओल्ड डीसी रोड स्थित चार मरला निवासी सावित्री (74) पिछले काफी समय से बीमारी से पीड़ित थी। मंगलवार रात उनका निधन हो गया। शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त सावित्री को संतान के रूप में दो बेटियां ही थीं। इकलौते बेटे प्रवीण का कुछ वर्ष पहले करंट लगने से पहले ही निधन हो गया था। सावित्री देवी के निधन के बाद जब बात अंतिम संस्कार की आई तो दोनों बेटी ज्योति व लीना बेटों की जिम्मेदारी निभाने आगे आईं। परिजनों व रिश्तेदारों ने भी अंतिम संस्कार के लिए सारी रस्म बेटियों से ही कराने का निर्णय लिया। दोनों बेटियों ने मां की शवयात्रा को कंधा भी दिया और मुखाग्नि भी दी। दोनों बहनें अपनी मां का नेत्रदान करने का फैसला भी कर चुकी थीं। ज्योति सोनीपत में अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं और उसकी भी दो बेटियां है। वहीं, लीना गृहणी हैं और उसकी एक बेटी है। दोनों बहनों के पिता भीम सैन स्काउट ट्रेनिंग कमिश्नर के पद पर कार्यरत हैं।