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अब जिला कारागार में नहीं बजेगी मोबाइल की घंटी

Sat, 27 May 2017 11:36 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला/ सोनीपत
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: सोनीपत जिला कारागार। - फोटो : amarujala beuro
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जिला कारागार में मोबाइल की घंटी पूरी तरह से बंद कर दी गई है। सोनीपत जिला कारागार में इसके लिए पांच यूनिवर्सल जैमर लगाए गए हैं। लाखों रुपये की लागत से लगाए गए जैमर से सोनीपत कारागार के चप्पे-चप्पे को कवर किया गया है। इलेक्ट्रानिक्स कार्पोरेशन ऑफ इंडिया की तरफ से इसके लिए बाकायदा जेल का सर्वे किया गया था। सर्वे करने के बाद ही जैमर लगाकर मोबाइल को घनघनाने से रोका गया है। पहले चरण में प्रदेश की सोनीपत व झज्जर जेल में यूनिवर्सल जैमर लगाए हैं। सोनीपत में पांच व झज्जर में सात जैमर लगे हैं। जैमर की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
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फोन के बल पर करते हैं वारदात
अक्सर प्रदेश की जिला कारागारों में मोबाइल फोन मिलने की शिकायत मिलती रहती है। जेल प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद बंदियों के सेल में घनघना रहे मोबाइल पर अंकुश नहीं लग पाता। अक्सर जेल से फोन कर बंदी अपना आपराधिक नेटवर्क चलाने के मामले सामने आ चुके हैं। जेल में मोबाइल पहुंचाने के भी कैदी नए-नए तरीके ईजाद कर लेते हैं। मोबाइल फोन से बंदी कारागार के अंदर से ही रंगदारी मांगने तक का काम करते हैं। इतना ही नहीं मोबाइल फोन का प्रयोग कर बदमाश जेल ब्रेक जैसी वारदात को अंजाम दे देेते हैं। ऐसे में कारागार में मोबाइल की घंटी न बज सके इसके लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे। अब पहले चरण में सोनीपत व झज्जर कारागार में यूनिवर्सल जैमर लगाए गए हैं। इसमें सोनीपत कारागार में पांच व झज्जर कारागार में सात जैमर लगाकर दोनों जेलों को पूरी तरह से सिग्नल प्रूफ किया गया है।
सोनीपत में हो चुकी है जेल ब्रेक की वारदात
सोनीपत जिला कारागार में बंदी ब्रेक कांड भी कर चुके हैं। 18 जनवरी, 2012 की रात को आठ बंदी कारागार की सलाखों को काटकर भाग चुके हैं। उसमें भी बंदियों को भगाने में मोबाइल फोन का प्रयोग किए जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद सुरक्षा की दृष्टि से डबल वॉल भी बनाई गई। उसके बाद भी जैमर की कमी महसूस हो रही थी। प्रदेश में सोनीपत व झज्जर कारागारों को संवेदनशील जेल की श्रेणी में रखा गया है। इसी के चलते दोनों की जेलों में यूनिवर्सल जैमर लगाकर उन्हें पूरी तरह से जैमर युक्त किया गया है।
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ईसीआई ने लगाया जैमर
सोनीपत कारागार में इलेक्ट्रानिक्स कार्पोरेशन आफ इंडिया (ईसीएल) की तरफ से जैमर लगाया गया। कारागारों में जैमर पहले भी लगाए गए थे, लेकिन वह संबंधित मोबाइल कंपनी के सिग्नल को ही रोक पाते थे। ऐसे में यूनिवर्सल जैमर की कमी महसूस हो रही थी। यूूनिवर्सल जैमर से सभी कंपनियों के सिग्नल को पूरी तरह से रोका जा सकता है। इसके लिए एक जैमर पर लाखों रुपये का खर्च किया गया है।
सोनीपत कारागार में मिल चुके हैं मोबाइल
सोनीपत कारागार में मोबाइल व सिम मिल चुके हैं। पुलिस ने जून, 2012 में जेल प्रशासन के साथ मिलकर सर्च अभियान चलाया था, जिसमें कारागार के अंदर से चार मोबाइल फोन व छह सिम बरामद किए गए थे। वर्ष 2016 में भी कुछ लोगों ने कपड़े में बांधकर सिम अंदर फेंकने का प्रयास किया था, लेकिन वह डबल वॉल के पास ही गिर गए थे, जिन्हें वार्डर ने बरामद कर लिया था।
मोबाइल मिलने पर पैरोल हो सकती है रद्द
जेल में अवैध मोबाइल रखने वाले बंदियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। मोबाइल मिलने पर पैरोल रद्द कर दिया जाता है। इसके लिए हरियाणा प्रिजनर्स गुड कंडक्ट एक्ट-1988 में संशोधन किया गया था। इसके अलावा विचाराधीन कैदियों के खिलाफ केस दर्ज किया जाता है।

कारागार में सुरक्षा को लेकर सभी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सोनीपत कारागार में पांच जैमर लगाए गए हैं। इसके साथ ही झज्जर कारागार में भी सात जैमर लगे हैं। सुरक्षा में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। कारागार में मोबाइल मिलने पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। हालांकि सोनीपत कारागार में लंबे समय से कोई मोबाइल नहीं मिला हैं। उसके बावजूद सभी एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
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-जयकिशन छिल्लर, जेल अधीक्षक, सोनीपत।
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