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डीईओ के छापे के बाद भी नहीं सुधर रहे स्कूल, बेच रहे निजी प्रकाशकों की किताबें

Sat, 01 Apr 2017 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो सोनीपत।
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गन्नौर में फीस वृद्धि के विरोध में रौनक पब्लिक स्कूल के सामने धरना देते अभिभावक। - फोटो : bureau
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जिला शिक्षा अधिकारी के छापे के बावजूद कई निजी स्कूल संचालकों की मनमानी जारी है। निजी स्कूलों की तरफ से अभिभावकों को एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की किताबें थमाकर कमाई की जा रही है। शहर के एक निजी स्कूल में अपने बेटे को दाखिला कराने गए अभिभावक को स्कूल ने प्राइवेट प्रकाशक की किताबों के पैसे लेकर एक निजी दुकान से किताब लेने की रसीद थमा दी। अभिभावक ने इसका विरोध किया और डीईओ को शिकायत देने की बात कही।
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बढ़ा दिया वार्षिक चार्ज
सेक्टर-23 निवासी अमित मलिक ने बताया कि वह अपने बेटे का दाखिला शहर के एक निजी स्कूल में चौथी कक्षा में करवाने गए थे। हालांकि स्कूल की ओर से दाखिला फीस नहीं ली, लेकिन पिछले वर्ष 9900 रुपये की बजाय 10 हजार 700 रुपये वार्षिक चार्ज वसूल लिया गया। वहीं, किताब लेने के लिए 2,416 रुपये की रसीद काटकर एनसीईआरटी की किताबें लेने की बजाय एक बुक डिस्ट्रिब्यूटर से किताब लेने की बात कही। अमित ने बताया कि इस नाम से शहर में कोई दुकान नहीं मिली। किताबें ककरोई चौक स्थित एक अन्य दुकान पर मिल रही थीं। जब वह दुकान पर किताबें लेने गया तो दुकानदार ने किताबें तो दे दी, लेकिन पक्का बिल नहीं दिया। जिससे उसने किताबें दुकानदार को लौटा दीं। अमित ने कहा कि स्कूलों की ओर से मनमर्जी कर अभिभावकों से पैसा लूटा जा रहा है। इसकी शिकायत सोमवार को डीईओ से की जाएगी।
रौनक स्कूल के बाहर अभिभावकों का रोष प्रदर्शन
गन्नौर में रौनक पब्लिक स्कूल पर फीस बढ़ोतरी का आरोप लगाते हुए अभिभावकों ने शनिवार को स्कूल के सामने धरना दिया। तुषार त्यागी, सोनू पुगथला, हिमांशु धीमान, नवीन मलिक, जोनी त्यागी, अंकित मल्हौत्रा ने बताया कि हर वर्ष स्कूल में मनमर्जी से फीस बढ़ा दी जाती है। स्कूल ने प्रत्येक छात्र की फीस में पांच से छह हजार रुपये तक बढ़ोतरी की गई है। ऐसे में उन्हें बच्चों को पढ़ाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि 5 अप्रैल तक अगर स्कूल प्रबंधन वार्षिक शुल्क में बढ़ोतरी का फैसला वापस नहीं लेता है तो वह आंदोलन करेंगे। इतना ही नहीं जब तक स्कूल की ओर से फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस नहीं लिया जाता जब तक स्कूल के सामने धरना जारी रहेगा।
फीस तय करने का अधिकार प्रबंधन कमेटी का
स्कूल फीस तय करने का अधिकार प्रबंधन कमेटी का है। कमेटी ने बच्चों को अत्याधुनिक सुविधा देने के लिए वार्षिक शुल्क में बढ़ोतरी की है, जो कुल फीस का 9 से 11 प्रतिशत अधिक है। नियमानुसार स्कूल हर वर्ष फीस में 9 से 11 प्रतिशत की वृद्धि कर सकते हैं, लेकिन फिर भी अभिभावकों की इस मांग को प्रबंधन कमेटी के सामने जरूर रखेंगे।
-इंद्रनाथ सिन्हा, प्राचार्य, रौनक पब्लिक स्कूल
अभिभावकों के समर्थन में उतरे मार्केट प्रधान व दुकानदार
निजी स्कूलों की ओर से मनमर्जी फीस, एनुअल व अन्य चार्ज लेने के विरोध में चल रहे छात्र अभिभावक संघ के आंदोलन को कई मार्केट प्रधान व दुकानदारों ने समर्थन दिया है। व्यापारियों ने भी आह्वान किया कि हर वर्ष दाखिला, एनुअल चार्ज व अन्य फंड नहीं भरेंगे। स्कूलों के खिलाफ विरोध के साथ आवश्यकता होने पर बाजार भी बंद किया जाएगा। कच्चे क्वार्टर मार्केट के प्रधान जवाहर चांदना, गुरुद्वारा रोड मार्केट के महासचिव संदीप कुमार, दयाल चौक मार्केट के प्रधान रामचंद बजाज, मामा-भांजा मार्केट के प्रधान नरेश बजाज तथा गीता भवन मार्केट के दुकानदारों ने अभिभावकों के आंदोलन का समर्थन किया।
शिकायत मिलते ही होगी कार्रवाई
निजी स्कूल नियम के विरुद्ध फीस, एनुअल व अन्य चार्ज नहीं ले सकते। अगर कोई स्कूल अभिभावकों से फीस के साथ अन्य चार्ज लेता है तो अभिभावक उसकी शिकायत करें। शिकायत मिलने पर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों में सिर्फ एनसीईआरटी की किताब ही बच्चों को पढ़ाई जा सकती हैं। अन्य किताब पढ़ाने या अभिभावकों को दिए जाने की शिकायत पर ठोस कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पहले भी स्कूलों को नोटिस दिया गया है।
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-जिले सिंह, डीईओ सोनीपत।
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