सोनीपत। फसल अवशेष प्रबंधन में सोनीपत मिसाल बनकर उभरा है। कभी पराली जलाने की घटनाओं के कारण यह जिला प्रदूषण की दृष्टि से चिंता का कारण बनता था, वहीं अब हालत में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में सैटेलाइट से पराली जलाने की 219 लोकेशन दर्ज की गई थी, जबकि इस वर्ष अब तक यह संख्या मात्र चार है। इनमें से केवल बेगा गांव में आग की पुष्टि हुई, जबकि अन्य तीन स्थानों पर फसल अवशेष जलते हुए नहीं पाए गए। सेटेलाइट लोकेशन में भी लगातार कमी आई है।
सोनीपत में खरीफ सीजन के दौरान एक लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है, जिनमें करीब 95 फीसदी क्षेत्र में बासमती धान की फसल होती है। वहीं रबी सीजन में किसान डेढ़ लाख हैक्टेयर भूमि में गेहूं की बिजाई करते हैं।
पहले फसल चक्र के बीच समयाभाव के चलते किसान खेतों में बचे अवशेषों में आग लगा देते थे, जिससे वातावरण प्रदूषित होता था। पराली अवशेष प्रबंधन को लेकर किसानों में जागरूकता बढ़ी है। आधुनिक प्रबंधन तकनीक का असर दिखने लगा है।
2021 में 219, 2022 में 94, 2023 में 78, 2024 में 70 और 2025 में अबतक 4 सेटेलाइट लोकेशन मिली है। इससे स्पष्ट है कि सोनीपत में पराली जलाने की घटनाओं में निरंतर कमी आई है जो प्रशासन और किसानों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
येलो जोन में 15 गांव, कर्मचारी नियुक्त
कृषि विभाग ने आग की आशंका वाले 15 गांवों को येलो जोन में शामिल किया है। इन गांवों में हर 50 किसानों पर एक कर्मचारी तैनात किया गया है, जबकि अन्य गांवों में 100 किसानों पर एक कर्मचारी निगरानी रख रहा है। पिछले वर्ष जहां 21 अक्तूबर तक 40 लोकेशन सेटेलाइट से दर्ज हुई थीं। वहीं इस बार सिर्फ 4 लोकेशन प्राप्त हुईं हैं।
लगातार चलाए जा रहे जागरूकता शिविर
फसल अवशेष प्रबंधन को जन आंदोलन का रूप देने के लिए कृषि विभाग ने स्कूलों और कॉलेजों में विशेष अभियान शुरू किया है। विभाग की टीमें विद्यार्थियों को न केवल पराली प्रबंधन के उपायों के बारे में जागरूक कर रही हैं, बल्कि पराली न जलाने की शपथ भी दिला रही हैं। शिविरों के माध्यम से किसानों को भी आधुनिक मशीन, मल्चर और सुपर सीडर के प्रयोग की जानकारी दी जा रही है।
वर्जन
विभाग फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर लगातार कारगर कदम उठा रहा है। किसानों को फसल अवशेषों का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।-डॉ. पवन शर्मा, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत।