एक तरफ जहां सिविल अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस खड़ी कर चालक सरकारी आदेशों की अवहेलना कर रहें है, वहीं दूसरी और मरीज को ले जाने को लेकर भी आपस भिड़ जाते हैं। ऐसा ही मामला शनिवार को भी सामने आया, जब मरीज के आने से पहले ही उसे ले जाने के नाम पर दो निजी एंबुलेंस चालक आपस में झगड़ा करने लगा। इतना ही नहीं आरोप है कि एक एंबुलेंस चालक ने बाहर से अपने साथियों को बुलवाकर दूसरे एंबुलेंस चालक की जमकर धुनाई करवा दी। दोनों के बीच सरेआम हुए झगड़े का मामला सिक्का कॉलोनी चौकी पुलिस में भी पहुंचा, हालांकि वहां दोनों पक्षों ने समझौैता कर लिया।
सिविल अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस खड़ी करने की अनुमति नहीं है। उसके बावजूद प्रतिदिन परिसर में एक दर्जन से ज्यादा प्राइवेट एंबुलेंस यहां खड़ी आसानी से दिख जाती हैं। उनमें मरीज को ले जाने को लेकर अक्सर तू-तू मैं-मैं भी हो जाती है, लेकिन शनिवार को तो तक हद हो गई जब दो एंबुलेंस चालकों ने झगड़ा करना शुरू कर दिया। एक चालक ने बाहर से युवकों को बुलाकर निजी चालक की जमकर धुनाई करवा दी। उसके बाद खुद ही निजी एंबुलेंस चालक सिक्का कॉलोनी चौकी में शिकायत देने पहुंच गया। जहां पर दोनों पक्षों ने स्वयं ही समझौता भी कर लिया।
मरीजों की कटती है जेब
किसी मरीज को ले जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस की बजाय प्राइवेट एंबुलेंस मौके पर पहुंच जाती है। अस्पताल में सरकारी एंबुलेंस नहीं होने का रोना रोया जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज को निजी एंबुलेंस चालकों को खर्च देकर ले जाना पड़ता है, जिससे मरीज को मोटी रकम देनी पड़ती है।
स्वास्थ्य विभाग के पास 18 एंबुलेंस, चल रहीं 15
मरीजों को लाने व ले जाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास 18 एंबुलेंस हैं। जहां गन्नौर में दो, गोहाना में दो, खरखौदा में दो, बढ़खालसा व जुआं में एक-एक एंबुलेंस हैं। वहीं, महिला मेडिकल कॉलेज खानपुर में दो एंबुलेंस हैं, जिनमें से एक दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण खराब खड़ी है। वहीं, सामान्य अस्पताल सोनीपत में पांच एंबुलेंस है। जिनमें से भी एक दुर्घटनाग्रस्त है। एक एंबुलेंस सर्विस के लिए भेजी गई है। एक अन्य एंबुलेंस जच्चा बच्चा को घर भेजने के लिए लगा रखी है। ऐसे में महज दो एंबुलेंस ही मौके पर उपलब्ध रह पाती है।
निजी एंबुलेंस को हटाने के लिए दो बार मिल चुके निर्देश
निजी एंबुलेंस चालकों को अस्पताल परिसर में अपनी गाड़ी खड़ी करने की अनुमति नहीं है। उसके बावजूद उन्हें हटाया नहीं जाता। उच्च अधिकारियों की ओर से दो बार पत्र भेजकर निर्देश भी दिए गए हैं, उसके बावजूद इन पर नकेल नहीं कसी जा सकी है।
मामला संज्ञान में आया है। अस्पताल परिसर में प्राइवेट एंबुलेंस खड़ी करने की अनुमति नहीं है। अगर परिसर में प्राइवेट एंबुलेंस खड़ी होती है तो चिकित्सा अधीक्षक से बात की जाएगी। अगर प्राइवेट चालक नहीं माने तो उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया जाएगा। अगर निजी एंबुलेंस चालक अस्पताल में माहौल खराब करने का प्रयास करेंगे तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
-डॉ. जेएस पुनिया, सिविल सर्जन।